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उत्तर प्रदेश की लोक एवं जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी नई पहचान : जयवीर सिंह

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उत्तर प्रदेश की लोक एवं जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी नई पहचान : जयवीर सिंह


लखनऊ, 25 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक एवं जनजातीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रसार के उद्देश्य से बुधवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता ज्ञापन उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, लखनऊ एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के मध्य संपन्न हुआ।

इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस समझौते को प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस साझेदारी से उत्तर प्रदेश की लोक एवं जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

इस समझौते के माध्यम से दोनों संस्थाएं शिक्षा, शोध, प्रशिक्षण एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में मिलकर कार्य करेंगी। इसके अंतर्गत लोक एवं जनजातीय कला, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण हेतु संयुक्त कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार, सांस्कृतिक उत्सव एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

समझौता ज्ञापन के तहत दोनों संस्थान सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने, शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विद्यार्थियों एवं कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए मिलकर प्रयास करेंगे। साथ ही, पारंपरिक कलाकारों एवं शिल्पकारों के कौशल विकास, दस्तावेजीकरण एवं प्रचार-प्रसार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

यह समझौता ज्ञापन उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के आवास पर सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। साथ ही, उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, लखनऊ के निदेशक अतुल द्विवेदी भी मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, लखनऊ द्वारा पूर्व में भी विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापन संपन्न किए जा चुके हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक