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समुद्र मंथन से मिला संदेश, कार्य सिद्धि के लिए शत्रु से भी करें मित्रता

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समुद्र मंथन से मिला संदेश, कार्य सिद्धि के लिए शत्रु से भी करें मित्रता


मीरजापुर, 03 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले में नरायनपुर के बैकुंठपुर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को वाराणसी से आए कथा मर्मज्ञ पं. विष्णु शंकर ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के जन्म, वामन अवतार, राजा बलि, गज-ग्राह, समुद्र मंथन और नंदोत्सव की कथा सुनाई। संगीतमय भजनों और बाल लीलाओं के वर्णन से कथा पंडाल भक्तिमय हो उठा।

समुद्र मंथन प्रसंग की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी कार्य को सिद्ध करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर शत्रु से भी मित्रता करनी चाहिए। वामन अवतार और राजा बलि की कथा के माध्यम से उन्होंने अहंकार का त्याग कर भगवान के प्रति समर्पण का संदेश दिया।

पं. विष्णु शंकर ने कहा कि श्रीकृष्ण की कथा सुनाने वाला वक्ता, कथा सुनने वाला श्रोता और कथा के संबंध में जिज्ञासा करने वाला व्यक्ति-तीनों पवित्र होते हैं। श्रीराम जन्म और श्रीकृष्ण जन्म की कथा पर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

आचार्य पं. अजय पाठक, पं. अमित पाठक तथा सहयोगी ब्राह्मण पं. तपेश मिश्र और पं. राहुल मिश्रा ने भागवत आरती कर प्रसाद वितरित किया। एडवोकेट प्रेमनाथ जायसवाल, मंगला जायसवाल, रमेश जायसवाल, महेश जायसवाल, अशोक, आशीष, सुमित, सुभाष, दीपक, ओमप्रकाश, श्रवण, गौतम, विजय, दिलीप, अजीत, दिनेश समेत बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा