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भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाएंगे, मांगलिक कार्य अब चार माह तक थमेंगे

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भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाएंगे, मांगलिक कार्य अब चार माह तक थमेंगे


- 25 जुलाई से शुरू होगा चतुर्मास, देवोत्थान एकादशी के बाद 20 नवंबर से फिर बजेंगी शहनाइयां

- क्षीरसागर में विश्राम करेंगे विष्णु, महादेव संभालेंगे सृष्टि की बागडोर, अब जप-तप का समय

लखनऊ, 23 जुलाई (हि.स.)। सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखने वाला चतुर्मास इस वर्ष 25 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी के साथ भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा के लिए चले जाएंगे। इसके साथ ही अगले चार माह तक विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार समेत अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।

मान्यता है कि भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद सृष्टि की व्यवस्था का दायित्व भगवान शिव के हाथों में आ जाता है। इसलिए चतुर्मास में भगवान महादेव की पूजा-अर्चना, जप और साधना का विशेष महत्व बताया गया है।

ज्योतिर्विद सतीष मणि ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में बताया कि इस वर्ष एकादशी तिथि का प्रारंभ 24 जुलाई की रात से होगा। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार वैष्णव धर्मावलंबी 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखेंगे। इसके बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवोत्थान एकादशी तक चतुर्मास रहेगा। 20 नवंबर को भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने के साथ ही मांगलिक कार्यों का शुभारंभ फिर से हो जाएगा।

चतुर्मास में साधना का विशेष महत्व

चतुर्मास को धर्म, तप और साधना का समय माना जाता है। इस दौरान साधु-संत और संन्यासी भ्रमण रोककर एक ही स्थान पर रहकर जप, तप और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। श्रद्धालु भी इस अवधि में पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक कार्यों को विशेष महत्व देते हैं।

ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार चतुर्मास में सूर्य देव दक्षिणायन हो जाते हैं। इस दौरान पृथ्वी पर सूर्य का प्रभाव अपेक्षाकृत कम होने से वातावरण में परिवर्तन आता है। बारिश के कारण जल की मात्रा बढ़ती है और कई प्रकार के जीव-जंतुओं की उत्पत्ति होती है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए इस समय संयमित जीवन और धार्मिक अनुशासन का महत्व बताया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश