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अभेद्य रही प्रधानमंत्री की सुरक्षा, सात हजार पुलिस कर्मी थे तैनात

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अभेद्य रही प्रधानमंत्री की सुरक्षा, सात हजार पुलिस कर्मी थे तैनात


नोएडा, 28 मार्च (हि.स.)। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन कार्यक्रम के लिए शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सात हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। कार्यक्रम स्थल पर 300 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। ड्रोन उड़ाने पर रोक थी। आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीमें तैयार थी।

अपर पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि कार्यक्रम के लिए पांच स्तरीय सुरक्षा (फाइव-टियर सिक्योरिटी) लागू की गई थी। हर एंट्री प्वाइंट पर सख्त चेकिंग की जा रही थी। लोगों की तलाशी, बैग और पहचानपत्र की जांच अनिवार्य की गई थी। बिना जांच के किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं थी। कार्यक्रम से पहले और कार्यक्रम के दौरान पूरे इलाके में एंटी-सबोटाज चेकिंग, बम निरोधक जांच और अन्य सुरक्षा जांच हो रही थी।

कार्यक्रम स्थल पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए थे। महिलाओं की चेकिंग के लिए अलग व्यवस्था की गई थी। पुलिस के अलावा पीएसी, आरएएफ, एटीएस और सीआईएसएफ जैसी सुरक्षा एजेंसियों को भी लगाया गया था। सभी एजेंसियां मिलकर काम कर रही थीं। ड्रोन से होने वाले खतरे को देखते हुए एंटी-ड्रोन टीमों को भी तैनात किया गया था। पूरा इलाका रेड जोन घोषित किया गया था, इसलिए ड्रोन उड़ाना पूरी तरह से प्रतिबंधित था।

उन्होंने बताया कि इस सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही थी, ताकि अफवाहों को रोका जा सके। कार्यक्रम स्थल पर पुलिस की ओर से 300 हाई रिज्योलूशन कैमरे लगाए गए थे। कैमरों की निगरानी के लिए एयरपोर्ट परिसर में कंट्रोल रूम बनाया गया था। इसमें डीसीपी या एडीसीपी रैंक के अधिकारी की तैनाती की गई थी। नोएडा एक्सप्रेस-वे पर वीवीआईपी मूवमेंट की निगरानी आईएसटीएमएस से की गई। लोगों की मदद के लिए कई जगह पुलिस हेल्प डेस्क भी बनाए गए थै। उन्होंने बताया कि आपात स्थिति से निपटने के लिए भी पूरी तैयारी की गई थी। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को अलर्ट रखा गया है। फायर ब्रिगेड और फायर टेंडर भी मौके पर तैयार थी। कार्यक्रम स्थल पर मेडिकल डेस्क, एंबुलेंस और एंबुलेंस के लिए अलग रास्ता (कॉरिडोर) बनाया गया था। 15 पार्किंग स्थल बनाए गए थे। जहां लगभग 20 हजार वाहनों को खड़ा करने की व्यवस्था थी। लोगों की सुविधा के लिए पहले से ही ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर दी गई थी। संचार व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए वायरलेस नेटवर्क और सुरक्षित (एन्क्रिप्टेड) कम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था। क्विक रिएक्शन टीम को भी तैनात किया गया था।

उन्होंने बताया कि बम और अन्य खतरों से निपटने के लिए स्निफर डॉग और डॉग स्क्वॉड की भी तैनाती की गई थी। कार्यक्रम खत्म होने के बाद भीड़ को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए खास योजना (फेज्ड डिस्पर्सल प्लान) बनाई गई थी। ट्रैफिक को जल्दी सामान्य करने के लिए अलग प्लान तैयार किया गया था। इसके अलावा, कार्यक्रम से जुड़े सभी वेंडर, स्टाफ और वॉलंटियर का वेरिफिकेशन किया गया था। कोडेड एंट्री पास और कंट्रोल डैशबोर्ड के जरिए पूरी व्यवस्था पर नजर रखी जा रही थी।

उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट के आस-पास बने मकानों और ऊंची इमारतों पर भी हथियार बंद सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इनमें से कई स्थानों पर स्नाइपर तैनात किए गए थे। जो हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रख रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के कार्यक्रम को देखते हुए गौतमबुद्ध नगर की रिजर्व फोर्स के साथ ही गैर जनपदों से भी फोर्स बुलाई गई थी। इसमें 10 आईपीएस अधिकारी गैर जनपदों से आए थे। इसके अलावा 10 कंपनी पीएसी और दो कंपनी आरएएफ भी तैनात की गई थी।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए जिले की सीमा क्षेत्रों पर भी फोर्स तैनात की गई थी। हरियाणा बॉर्डर पर विशेष निगरानी की जा रही थी। गौतमबुद्ध नगर की सीमा से सटे हुए जिले अलीगढ़, बुलंदशहर और अन्य जिलों की सीमा पर भी निगरानी थी। हर आधा किलोमीटर पर पुलिस पिकेट और गाड़ियां तैनात की गई थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी