वाराणसी : आईआईवीआर में जीनोम एडिटिंग लैब, बीएसएल-3 प्रयोगशाला और स्पीड ब्रीडिंग सुविधा शुरू
—आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने किया संस्थान का दौरा, सब्जियों की उन्नत किस्मों के विकास और किसानों की आय बढ़ाने पर दिया जोर
वाराणसी, 18 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. मांगी लाल जाट ने भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) वाराणसी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में बीएसएल-3 प्रयोगशाला और स्पीड ब्रीडिंग सुविधा का उद्घाटन किया, जबकि निर्माणाधीन जीनोम एडिटिंग प्रयोगशाला के शिलान्यास के लिए भूमि पूजन किया । इन आधुनिक सुविधाओं से सब्जी फसलों की उन्नत किस्मों के विकास, अनुसंधान कार्यों में तेजी और रोग-कीट प्रतिरोधी तथा जलवायु-अनुकूल किस्में तैयार करने में मदद मिलेगी।
दौरे के दौरान आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. देवेंद्र कुमार यादव, उप महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. राजवीर सिंह तथा सहायक महानिदेशक (फसल एवं बागवानी विज्ञान) डॉ. सुधाकर पांडेय भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों ने संस्थान परिसर में रक्तचंदन का पौधा रोपित किया।
जीनोम एडिटिंग से विकसित होंगी उन्नत किस्में
संस्थान परिसर में निर्माणाधीन जीनोम एडिटिंग प्रयोगशाला सब्जी फसलों के आनुवंशिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके माध्यम से उच्च उत्पादकता, बेहतर पोषण गुणवत्ता, रोग एवं कीट प्रतिरोध तथा जलवायु परिवर्तन के अनुकूल किस्मों के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
बीएसएल-3 प्रयोगशाला से सुरक्षित अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा
संस्थान में स्थापित बायोसेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल-3) प्रयोगशाला का भी उद्घाटन किया गया। यह अत्याधुनिक सुविधा निर्धारित जैव सुरक्षा मानकों के तहत उन्नत अनुसंधान कार्यों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराएगी। इससे संस्थान की अनुसंधान क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
स्पीड ब्रीडिंग से कम समय में विकसित होंगी नई किस्में
महानिदेशक ने संस्थान की स्पीड ब्रीडिंग सुविधा का उद्घाटन भी किया। इस तकनीक के जरिए सब्जी फसलों की पीढ़ियों को तेजी से विकसित किया जा सकेगा। परंपरागत प्रजनन प्रक्रिया में जहां एक मौसम में सामान्यतः एक पीढ़ी प्राप्त होती है, वहीं स्पीड ब्रीडिंग की मदद से एक वर्ष में कई पीढ़ियां विकसित करना संभव होगा। इससे नई किस्में तैयार करने में लगने वाला समय कम होगा और किस्म सुधार कार्यक्रमों को गति मिलेगी।
वैज्ञानिकों से संवाद, दलहन-तिलहन अनुसंधान पर जोर
दौरे के दौरान डॉ. जाट ने संस्थान के प्रयोग क्षेत्रों का भ्रमण किया और सब्जी फसलों की नई किस्मों, हाइब्रिड तकनीकों, उत्पादन प्रौद्योगिकियों तथा विभिन्न प्रदर्शनों का अवलोकन किया। वैज्ञानिकों से चर्चा करते हुए उन्होंने किस्म सुधार और उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों को तेज करने के साथ दलहन एवं तिलहन फसलों पर केंद्रित अनुसंधान को भी प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
इस अवसर पर किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के प्रतिनिधियों और प्रगतिशील किसानों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सब्जियों के साथ दलहन एवं तिलहन फसलों का विस्तार, उन्नत कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने और उनकी आय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई।
किसान-उन्मुख अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा
रविवार को संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने अनुसंधान उपलब्धियों, नई पहलों और किसानों के लिए विकसित की जा रही तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आईआईवीआर, वाराणसी देश में सब्जी अनुसंधान का एक अग्रणी केंद्र है। संस्थान उन्नत किस्मों, उत्पादन तकनीकों, संरक्षण प्रौद्योगिकियों और किसान-उन्मुख समाधानों के विकास पर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जीनोम एडिटिंग, बीएसएल-3 प्रयोगशाला और स्पीड ब्रीडिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और किसानों की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप सब्जियों की अगली पीढ़ी की किस्में विकसित करने में सहायक होंगी।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

