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निराश्रित गोवंश को मिला सरकार का सहारा, 1645 गोवंश को मिला नया ठिकाना

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निराश्रित गोवंश को मिला सरकार का सहारा, 1645 गोवंश को मिला नया ठिकाना


मीरजापुर, 13 मई (हि.स.)। सड़कों पर भटकने वाले निराश्रित गोवंश अब सुरक्षित आश्रय और बेहतर देखभाल पा रहे हैं। प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना जिले में उम्मीद की नई तस्वीर पेश कर रही है। योजना के जरिए अब तक 1645 गोवंश को संरक्षण मिल चुका है, जबकि 518 पशुपालक उनकी सेवा में आगे आए हैं। जिले के 12 विकासखंडों में संचालित 49 गोवंश आश्रय स्थलों में कुल 14435 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। सरकार की पहल से न सिर्फ बेसहारा गोवंश को छत मिली है, बल्कि ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मजबूती भी मिल रही है।

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार पाठक ने बुधवार को बताया कि मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत पशुपालकों को प्रति गोवंश 1500 रुपये प्रतिमाह सीधे बैंक खाते में दिए जा रहे हैं। योजना के तहत एक लाभार्थी अधिकतम चार गोवंश अपने पास रख सकता है। उन्होंने बताया कि जिले में 518 पशुपालकों को अब तक 1645 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य सिर्फ गोवंश संरक्षण ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है। आश्रय स्थलों में गोवंश के लिए चारा, पानी और उपचार की समुचित व्यवस्था की गई है। बीमार गोवंश के इलाज की सुविधा भी विभाग द्वारा लगातार उपलब्ध कराई जा रही है।

गोसेवा के साथ मिल रहा आर्थिक सहारा अटारी गांव निवासी अजय कुमार ने बताया कि योजना के माध्यम से उन्हें बेसहारा गोवंश की सेवा करने का अवसर मिला है। समय पर आर्थिक सहायता मिलने से चारे-पानी की व्यवस्था आसानी से हो जाती है। वहीं देवपुरा गांव की लाभार्थी उषा भारती का कहना है कि यह योजना छोटे पशुपालकों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। इससे गोवंश संरक्षण के साथ परिवार को आर्थिक संबल भी मिल रहा है। सरकार की इस पहल से जिले में गोसंरक्षण को नई दिशा मिल रही है और पशुपालकों में भी योजना को लेकर उत्साह बढ़ रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा