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गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय की पुण्य स्मृति में साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह 23 सितंबर से, संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ' समेत कई आयोजन

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गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय की पुण्य स्मृति में साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह 23 सितंबर से, संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ' समेत कई आयोजन


गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय की पुण्य स्मृति में साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह 23 सितंबर से, संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ' समेत कई आयोजन


- वृंदावन के प्रख्यात कथावाचक मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास जी महाराज सुनाएंगे कथा

गोरखपुर, 21 सितंबर (हि.स.)। श्रीगोरक्षपीठ की गौरवशाली आध्यात्मिक-धार्मिक परंपरा को एक नई दिशा प्रदान करने वाले महान देशभक्त, अपराजेय धर्मयोद्धा ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज का विराट व्यक्तित्व आज भी हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। दोनो महंत जी महाराज राष्ट्रवादी चरित्र एवं आध्यात्मिक चेतना से प्रदीप्त ऐसे संत थे जो अतीत, वर्तमान और अनागत सबको प्रत्यक्षवत् देखते थे। ब्रह्मलीन महंतद्वय हिंदू समाज के रक्षक और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे। उनकी स्मृतियां हमें नई ऊर्जा देती हैं। इसी क्रम में विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी पावन स्मृति में सप्तदिवसीय श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन 24 सितंबर से 30 सितंबर, 2026 तक श्रीगोरक्षनाथ मंदिर में होगा। साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतर्गत ही 23 सितंबर से साप्ताहिक 'संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ' का भी आयोजन होगा। श्री रेवासा धाम, वृंदावन से पधारे श्रीमद्भगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर एवं मलूकपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज कथामृत का पान कराएंगे।

यह जानकारी श्रीगोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ जी ने साेमवार काे दी। उन्होंने कहा कि युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने धर्म, संस्कृति, शिक्षा, समाज एवं राष्ट्र के प्रायः सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बहुआयामी एवं लोक संग्रही व्यक्तित्व से अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज की थी। अनेक महत्वपूर्ण धार्मिक-आध्यात्मिक एवं राष्ट्रीय मुद्दों पर सड़क से संसद तक दोनों महंत जी महाराज की ओजपूर्ण वाणी गूंजती रहती थी। वर्ष 1920 से लेकर इक्कीसवीं शताब्दी के प्रथम दशक तक देश की कोई भी राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक समस्या ऐसी नहीं थी, जिस पर क्रमशः दोनों ब्रह्मलीन महाराज जी की प्रभावपूर्ण उपस्थिति दर्ज न हुई हो। देश में वे आध्यात्मिक-सामाजिक पुनर्जागरण के अग्रदूत के रूप में प्रतिष्ठित हुए तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में शैक्षिक पुनर्जागरण के अग्रदूत बनकर उभरे।

योगी कमलनाथ जी ने कहा कि युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज का कृतित्व आज भी प्रकाश स्तंभ की तरह राष्ट्र जीवन के पथ पर हमारे मार्गदर्शन के लिए विद्यमान है। ब्रह्मलीन महंतद्वय जी महाराज भारत के राष्ट्रीय जीवन की मुख्यधारा का प्रतिनिधित्व करने वाली हिंदू जीवन पद्धति से अनुप्रेरित समाज को एक समरस, सुगठित और सुदृढ़ समाज के रूप में देखना चाहते थे। उनके सपनों के समर्थ भारत के पुनर्निर्माण एवं हिंदू समाज के पुनर्जागरण हेतु, उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर प्रतिवर्ष होने वाला समारोह आमजनमानस को राष्ट्रीय एवं सामाजिक मुद्दों पर प्रेरणा देने का माध्यम होता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 24 सितंबर से 30 सितंबर तक सप्तदिवसीय श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश के अनेक संत, महात्मा, धर्माचार्य, विद्वत्जन, समाजसेवी भाग लेंगे।

साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतर्गत समसामयिक विषयों पर चलने वाला सम्मेलन 24 सितंबर से प्रारम्भ होगा। 24 सितंबर को उद्घाटन समारोह में 'भारतीय ज्ञान परंपरा का वर्तमान परिप्रेक्ष्य' विषयक सम्मेलन, 25 सितम्बर को 'नशा नाश का कारण है', 26 को 'लोकतंत्र की जननी है भारत', 27 को 'संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति, 28 सितंबर को 'भारतीय संस्कृति एवं गो-सेवा' विषयक सम्मेलन सम्पन्न होंगे। 29 सितंबर को युगपुरुष महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की तथा 30 सितंबर को राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की श्रद्धांजलि सभा आयोजित होगी। 29-30 सितम्बर को अखंड मानस पाठ तथा भंडारा होगा।

श्रद्धांजलि समारोह में कथावाचक वृंदावन से स्वामी श्री राजेंद्रदासदास देवाचार्य जी महाराज, रोहतक हरियाणा से महंत बालकनाथ, जूनागढ़ गुजरात से पधारे महंत शेरनाथ, नैमिषारण्य से पधारे स्वामी विद्या चैतन्य, गाजियाबाद से महंत नारायण गिरी, वाराणसी से डॉ. रामकमलदास वेदांती, हरिद्वार से पधारे महंत चेताईनाथ, कच्छ गुजरात से महंत देवनाथ , वाराणसी से पधारे महंत संतोषदास , गुजरात से महंत कमलनाथ , प्रयागराज से पधारे जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज, अयोध्या से महंत रामदिनेशाचार्य, अयोध्या से स्वामी श्रीधराचार्य जी, महंत राघवाचार्य , महंत रामलखनदास, महंत धर्मदास, ब्रह्मचारी दासलाल जी, महन्त राघवेशदास , महंत राजूदास , देवीपाटन से महंत मिथलेशनाथ, पीर शेरनाथ, योगी लालनाथ, महंत नरसिंहदास, महंत शिवनाथ , योगी जिताईनाथ, जगद्गुरू स्वामी घनश्यामाचार्य , महंत गंगादास सहित देशभर के प्रतिष्ठित धर्माचार्य, साधु एवं संत सम्मिलित होंगे।

साथ ही विभिन्न तिथियों के सम्मेलनों में ख्याति प्राप्त वक्ता डॉ. वी. रामानाथन (आईआईटी, बीएचयू, वाराणसी), प्रो. विनोद सोलंकी (प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख, स्वामी विवेकानन्द केंद्र उत्तर प्रदेश), प्रो. संजीव कुमार शर्मा (पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतीहारी, बिहार,) प्रो. मुरली मनोहर पाठक, कुलपति (श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली), श्याम बिहारी गुप्ता (अध्यक्ष, गोसेवा आयोग उ.प्र.) जसवंत सिंह उर्फ अतुल सिंह (उपाध्यक्ष, गोसेवा आयोग उ.प्र), प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा (पूर्व अध्यक्ष, उच्च शिक्षा आयोग प्रयागराज), प्रो. शिवशरण दास, (भगवती निवास, आर्यनगर गोरखपुर), डॉ. पृथ्वीनाथ सिंह, (सीनियर रेजीडेन्ट, गर्वमेन्ट मेडिकल कालेज अम्बेडकरनगर), प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह निदेशक (गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज), प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त (पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष, उ.प्र. हिंदी संस्थान, लखनऊ) लालमणि त्रिपाठी (गीताप्रेस, गोरखपुर) द्वारा विशद चर्चा की जाएगी।

योगी कमलनाथ जी ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने वाले श्रद्धालुओं के लिये श्रीगोरखनाथ मंदिर की ओर से प्रतिदिन निःशुल्क बस सेवा (लाने और ले जाने हेतु) विभिन्न स्थानों से अपराह्न 2.00 बजे से पूर्व निर्धारित रास्तों पर उपलब्ध होगी। जो भी श्रद्धालु निःशुल्क बस सेवा की सुविधा लेना चाहते हैं, वे समय से उपस्थित होकर सेवा ले सकते हैं। निर्धारित मार्ग किये गये हैं- इनमें महुआतर ओवरब्रिज-महेसरा- मोहरीपुर- बरगदवा-राजेन्द्रनगर होते हुये श्रीगोरखनाथ मंदिर, गीता गार्डेन, असुरन चौक एचएन सिंह चौराहा- राप्तीनगर से हाईडिल होते हुए-स्पोर्ट्स कालेज-जंगल नकहा ओवरब्रिज-राणी सती मंदिर-रामनगर चौराहा होते हुये श्रीगोरखनाथ मंदिर, मुंशी प्रेमचंद पार्क-टीडीएमस्कूल-अलहदादपुर चौराहा-बेतियाहाता चौराहा- गोलघर-काली मंदिर- धर्मशाला पुल-तरंग क्रासिंग होते हुये श्रीगोरखनाथ मंदिर, इंजीनियरिंग कालेज-गिरधरगंज- छात्रसंघ चौराहा-विश्वविद्यालय चौराहा-कार्मल स्कूल- यातायात तिराहा, धर्मशाला-तरंग क्रासिंग होते हुये श्रीगोरखनाथ मंदिर हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय