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अटल भक्ति से प्रसन्न होते हैं भगवान, गुरु कृपा से खुलता है मुक्ति का मार्ग

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अटल भक्ति से प्रसन्न होते हैं भगवान, गुरु कृपा से खुलता है मुक्ति का मार्ग


- भागवत कथा के चौथे दिन प्रह्लाद चरित्र, वामन अवतार और कृष्ण प्राकट्य का प्रसंग

मीरजापुर, 02 अक्टूबर (हि.स.)। पहाड़ी विकासखंड के जद्दूपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और राजा बलि के समर्पण का प्रसंग सुन श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा व्यास पं. विष्णु धर द्विवेदी ने प्रह्लाद चरित्र, वामन अवतार, रामकथा और भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का प्रसंग सुनाया।

कथा व्यास ने कहा कि प्रह्लाद ने पिता हिरण्यकश्यप की यातनाओं के बावजूद भगवान का स्मरण नहीं छोड़ा। उसकी अडिग भक्ति के कारण भगवान नरसिंह को प्रकट होकर अधर्म का अंत करना पड़ा। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों, सच्चा भक्त भगवान पर विश्वास नहीं छोड़ता।

वामन अवतार की कथा में राजा बलि के समर्पण और गुरु-कृपा का महत्व बताया गया। उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा से भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। रामकथा के माध्यम से धर्म, मर्यादा और कर्तव्य पालन का संदेश दिया गया। कथा के दौरान श्रीकृष्ण प्राकट्य महोत्सव मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का प्रसंग शुरू होते ही कथा स्थल जयकारों और भजनों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान का पूजन किया।

इस दौरान पं. श्रीनिवास ओझा, पं. विजय चड्ढा, पं. प्रेमशंकर ओझा, आशीष मिश्रा, राधे मिश्रा, ज्ञान प्रकाश दुबे समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा