अमेठी : घुमंतू गौरव समागम में पहुंचे समाज कल्याण मंत्री, कहा—समाज की समस्याएं दूर कर मुख्य धारा में ला रहें
-20 दिन में प्रमाण पत्र बनवाने के निर्देश
अमेठी, 24 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के इन्हौना में शनिवार काे आयोजित घुमंतू गौरव समागम में उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। समागम में घुमंतू समाज की समस्याओं, बच्चों के प्रमाण पत्र, शिक्षा, खेल और आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दे उठाए गए।
शनिवार को हुए इस कार्यक्रम में घुमंतू समाज के लोगों ने अतिथियों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि आय, निवास और जन्म संबंधी प्रमाण पत्रों के अभाव में बच्चों को शिक्षा, खेल और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी होती है। कई प्रतिभाशाली बच्चे आवश्यक दस्तावेज नहीं होने के कारण अवसरों से वंचित रह जाते हैं।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने इन समस्याओं को सुनते हुए अधिकारियों को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए गांवों में शिविर लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों के दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। जिन बच्चों के उम्र संबंधी प्रमाण पत्र नहीं बने हैं, उनके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी से बातचीत कर एक-दो दिन के भीतर स्वास्थ्य विभाग का शिविर लगवाने की व्यवस्था करने का आश्वासन भी दिया।समागम के दौरान घुमंतू समाज की उन बेटियों का मुद्दा विशेष रूप से उठाया गया, जिन्होंने कबड्डी में जिला स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन आवश्यक दस्तावेजों और खेल किट की कमी के कारण आगे की प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकीं। राज्यमंत्री ने ब्लॉक प्रमुख मुन्ना सिंह से इन बेटियों को कबड्डी किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने को कहा, ताकि उन्हें खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
मुख्य अतिथि समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने अपने संबोधन में घुमंतू एवं विमुक्त समाज के ऐतिहासिक संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1871 में बनाए गए आपराधिक जनजाति अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून के तहत कई समुदायों को जन्मजात अपराधी के रूप में चिह्नित किया गया था। इसके कारण इन समुदायों को लंबे समय तक सामाजिक भेदभाव और कलंक का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद वर्ष 1952 में इस कानून को समाप्त किए जाने से इन समुदायों को विमुक्त जाति के रूप में पहचान मिली। उन्होंने समाज के लोगों को शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में अब्दुल गनी बंजारा ने घुमंतू समाज के लोगों को कथित तौर पर पुलिस कार्रवाई के दौरान होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में वास्तविक आरोपित नहीं मिलने पर घुमंतू समाज के लोगों को भी हिरासत में ले लिया जाता है। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर हो, जिससे निर्दोष लोगों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। समागम के संयोजक रावेन्द्र कुमार बारा, राष्ट्रीय अध्यक्ष विमुक्त घुमंतू बारा समाज परिषद एवं महानगर लखनऊ अध्यक्ष, अनुसूचित जाति मोर्चा भाजपा ने भी समाज के बच्चों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रमाण पत्रों के अभाव में बच्चों को शिक्षा, खेल और अन्य अवसरों का लाभ लेने में कठिनाइयां होती हैं। उन्होंने प्रतिभाशाली बच्चों और बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासनिक सहयोग की आवश्यकता बताई।
इस अवसर पर गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख मुन्ना सिंह, बंटी सिंह, धर्मेश मिश्रा, सरफराज प्रधान सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। समागम में प्रमाण पत्र बनवाने, बच्चों के उम्र संबंधी दस्तावेज तैयार कराने और कबड्डी खेलने वाली बेटियों को खेल किट उपलब्ध कराने के निर्देश प्रमुखता से सामने आए। अब इन निर्देशों के अनुरूप संबंधित विभागों की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर लोगों की निगाहें रहेंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश त्रिपाठी

