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भारत विभिन्न संस्कृतियों का रंग-बिरंगा गुलदस्ता : प्रो. मोहम्मद सलीम

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भारत विभिन्न संस्कृतियों का रंग-बिरंगा गुलदस्ता : प्रो. मोहम्मद सलीम


फर्रुखाबाद, 05 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद में सद्भावना मंच के तत्वावधान में सोमवार को नव भारत सभा भवन, ठंडी सड़क पर सद्भावना सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर देश में आपसी भाईचारे, सौहार्द और सामाजिक एकता को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि जमाअते इस्लामी हिन्द के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा कि मनुष्य का मूल स्वभाव प्रेम और मोहब्बत है। इंसान स्वाभाविक रूप से नफरत को पसंद नहीं करता। उन्होंने कहा कि जो विचार मनुष्यों के बीच भेदभाव और नफरत पैदा करे, उसे धर्म नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि अंग्रेजों के शासनकाल में भारतीयों को आपस में बांटकर फूट डालने की नीति अपनाई गई, जिसका प्रभाव लंबे समय तक रहा।

सम्मेलन का उद्घाटन वारिस हुसैन के संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं और विचारों का रंग-बिरंगा गुलदस्ता है। उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि आम लोग अब नफरत के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

भंते नागसेन, आशा राम, अधिवक्ता जवाहर सिंह गंगवार, अधिवक्ता मोहम्मद अनीस खां, मोइन साहब, अभिलाख जाटव, नीरज प्रताप शाक्य, बिलाल शफीकी और जमशेद शाह साहिबा ने भी विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारा आज की प्रमुख जरूरत है। देश की एकता और सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना होगा।

मुख्य आयोजक डॉ. रामकृष्ण राजपूत ने अतिथियों और श्रोताओं का स्वागत किया। मोहम्मद नासिर खान ने अतिथियों का बैज लगाकर अभिनंदन किया। डॉ. मोहम्मद मोहसिन ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन सद्भावना मंच उत्तर प्रदेश के संयोजक अब्दुल वहाब ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / चंद्रपाल सिंह सेंगर