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प्रदेश का पहला क्वांटम सूचना एवं प्रौद्योगिकी में एम टेक कार्यक्रम ट्रिपल आईटी में जुलाई से शुरू : प्रो सुतावने

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प्रदेश का पहला क्वांटम सूचना एवं प्रौद्योगिकी में एम टेक कार्यक्रम ट्रिपल आईटी में जुलाई से शुरू : प्रो सुतावने


--क्वांटम सूचना एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में ट्रिपल आईटी लम्बी छलांग लगाने को तैयार

प्रयागराज, 26 मार्च (हि.स)। क्वांटम सूचना एवं प्रौद्योगिकी में प्रदेश का पहला एम टेक कार्यक्रम भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) इलाहाबाद झलवा परिसर में इस जुलाई से शुरू हो रहा है। इसकी घोषणा ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के निदेशक प्रो. मुकुल शरद सुतावने ने गुरुवार को किया।

अनुप्रयुक्त विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित “क्वांटम सूचना एवं प्रौद्योगिकी” पर चार दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र पर निदेशक ने बताया कि इस कार्यशाला में देश भर के प्रमुख शोधकर्ता, शिक्षाविद् एवं छात्र एकत्रित हुए हैं, जो क्वांटम विज्ञान के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र और उसकी परिवर्तनकारी सम्भावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे।

इस अवसर पर प्रो. सुतावने ने संस्थान की अत्याधुनिक शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने आने वाले दशकों में क्वांटम तकनीकों के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करते हुए इस क्षेत्र में भारत की क्षमता को मजबूत करने के लिए चल रही राष्ट्रीय पहलों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, “क्वांटम तकनीक विज्ञान और इंजीनियरिंग में अगला बड़ा परिवर्तन साबित होगी। ट्रिपल आईटी जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है कि वे प्रतिभाओं का विकास करें, अंतः विषय शोध को प्रोत्साहित करें और भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार करें।” उन्होंने अकादमिक संस्थानों, शोध संगठनों और उद्योगों के बीच सहयोग को भी आवश्यक बताया।

ट्रिपल आईटी के पीआरओ डॉ पंकज मिश्र ने बताया कि कार्यशाला का उद्घाटन हरीशचंद्र अनुसंधान संस्थान, प्रयागराज के प्रो. उज्ज्वल सेन ने किया। उन्होंने अपने क्वांटम तकनीकों की बढ़ती प्रासंगिकता पर जोर देते हुए समाज में उनके गहरे प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि क्वांटम सूचना विज्ञान सुरक्षित संचार, कम्प्यूटिंग, स्वास्थ्य सेवाओं और डेटा प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है।

प्रो. सेन ने कहा, “क्वांटम तकनीक केवल भौतिकी का उन्नत क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह जटिल सामाजिक समस्याओं के समाधान का एक सशक्त माध्यम भी है। अभेद्य एन्क्रिप्शन से लेकर अत्यंत तीव्र गणना तक, इसकी सम्भावनाएं असीमित हैं।” उन्होंने छात्रों और शोधकर्ताओं को इस उभरते क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी करने तथा भारत की वैश्विक उपस्थिति को सशक्त बनाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर प्रो. अखिलेश तिवारी (डीन, फैकल्टी डेवलपमेंट), प्रो.पवन चक्रबर्ती (डीन, अकादमिक) एवं डॉ. उपेंद्र कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीजीत भट्टाचार्य ने बताया कि इस कार्यशाला में क्वांटम कम्प्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और क्वांटम एल्गोरिद्म जैसे प्रमुख विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, प्रायोगिक सत्र तथा पैनल चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रख्यात वैज्ञानिक एवं संकाय सदस्य इसमें वक्ता के रूप में भाग ले रहे हैं।

डॉ मिश्र ने बताया कि इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों जिसमें छात्र, शोधार्थी और संकाय सदस्य शामिल हैं, को क्वांटम तकनीकों के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों पहलुओं की जानकारी प्राप्त होगी। इसका उद्देश्य युवाओं को प्रेरित करना और उन्हें इस तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में योगदान देने के लिए आवश्यक ज्ञान से सुसज्जित करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र