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संतुलित उर्वरक के उपयोग से मिट्टी होगी स्वस्थ, चौपाल में वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ेगी आय

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संतुलित उर्वरक के उपयोग से मिट्टी होगी स्वस्थ, चौपाल में वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ेगी आय


मीरजापुर, 07 मई (हि.स.)। आईसीएआर-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) द्वारा संतुलित उर्वरक, उचित प्रबंधन–स्वस्थ मिट्टी, समृद्ध किसान विषय पर जनपद मीरजापुर के अराजी लाइन ब्लॉक के महरच्छ गांव में गुरूवार को किसान जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य, संतुलित पोषण प्रबंधन तथा जैविक व टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करना रहा।

संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह ने किसानों को केंचुओं के महत्व और संतुलित उर्वरकों के प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रसायनिक उर्वरकों का उपयोग संतुलित मात्रा में करना चाहिए तथा गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद और जैव उर्वरकों का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए। इससे मिट्टी में पोषक तत्वों की पूर्ति होती है और भूमि की उर्वरता बनी रहती है।

उन्होंने बताया कि मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव फास्फोरस, पोटाश समेत अन्य पोषक तत्वों को घुलनशील बनाकर पौधों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ट्राइकोडर्मा, पीएसबी और अन्य जैव एजेंट फसलों को रोगों से बचाने के साथ उत्पादन बढ़ाने में सहायक हैं। इनके प्रयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।

डॉ. अच्युत सिंह ने कहा कि किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए, जिससे खेती की लागत घटेगी और भूमि की गुणवत्ता बनी रहेगी। वहीं डॉ. आशुतोष राय ने संतुलित आहार, फल व सब्जियों में विविधता तथा जैविक खादों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और दवाइयों के अत्यधिक उपयोग को कम करना जरूरी है, इससे मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण कम होगा तथा मानव स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। कार्यक्रम में किसानों को संस्थान द्वारा विकसित बायोडरमा एवं एजोबीसी सूक्ष्मजीव कंसोर्टियम वितरित किए गए। साथ ही संतुलित उर्वरक एवं उचित प्रबंधन से संबंधित प्रचार-पत्रक भी बांटे गए।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा