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फतेहपुर में 15-15 दिन की रोस्टिंग से सूखी नहरें, धान रोपाई के लिए तरसे किसान

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फतेहपुर में 15-15 दिन की रोस्टिंग से सूखी नहरें, धान रोपाई के लिए तरसे किसान


फतेहपुर, 09 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में धान रोपाई के समय में सुजानपुर रजबहा समेत क्षेत्र की कई माइनरों में 15-15 दिन के रोस्टर से पानी नहर में आने से हजारों किसानों के सामने खेती के लिए समय से पानी न मिलने से गंभीर संकट खड़ा हो गया है। खेत रोपाई के लिए तैयार हैं। धान की बेड़ भी खेतों में डाल दी गई है, लेकिन नहर सूखी होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग द्वारा बिना पूर्व सूचना के 15-15 दिन की रोस्टिंग लागू कर नहरों में पानी रोक दिया गया, जिससे लाखों रुपये की धान की रोपाई पर संकट मंडरा रहा है। किसान राज बहादुर सिंह ने बताया कि सुजानपुर रजबहा क्षेत्र में मुख्य रूप से मंसूरी धान की खेती होती है, जिसकी रोपाई जुलाई में होती है। रोपाई शुरू होते ही नहर का पानी बंद कर दिया गया। इससे खेतों के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है और धान की बेड़ सूखने लगी है।

किसान दिनेश प्रताप सिंह, प्रमोद सिंह, शैलेश सिंह, सोनू सिंह, हरवंश सिंह और रामसुमेर मौर्य समेत अन्य का आरोप है कि नहर विभाग स्थानीय किसानों की जरूरतों की अनदेखी कर पानी को खागा तहसील के धाता क्षेत्र और कौशाम्बी की ओर भेज रहा है। उनका कहना है कि निचली गंगा नहर की समय पर सफाई भी नहीं कराई गई, जिससे गाद और झाड़ियों के कारण पानी का प्रवाह पहले से ही प्रभावित था।

किसानों का कहना है कि अधिकारियों से शिकायत करने पर केवल रोस्टिंग का हवाला दिया जा रहा है। किसानों का सवाल है कि धान रोपाई के समय में पानी बंद करने का निर्णय किसके हित में लिया गया और यदि फसल खराब होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। किसानों ने सुजानपुर रजबहा में तत्काल पानी छोड़े जाने, नहर की सफाई कराने और फसल बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

भाकियू (अराजनैतिक) असोथर ब्लॉक महामंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि धान रोपाई के सबसे महत्वपूर्ण समय में नहर का पानी बंद करना किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि यदि पानी के अभाव में किसानों की रोपाई प्रभावित होती है और धान का लेव (जोताई) खराब होता है, तो उसके नुकसान की भरपाई आखिर कौन करेगा? विभाग को किसानों की जरूरतों को देखते हुए तत्काल हेड खोलकर पानी छोड़ा जाना चाहिए। यदि सिंचाई विभाग ने जल्द निर्णय नहीं बदला तो भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) किसानों के साथ नहर विभाग के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी।

नहर विभाग के अवर अभियंता विकास सिंह ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर रोस्टिंग व्यवस्था के अनुसार संबंधित हेड बंद कराया गया है। विभाग रोस्टिंग शेड्यूल के अनुसार ही जलापूर्ति संचालित कर रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र कुमार