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जीवन के हर क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही एआई : डॉ. विजय तिवारी

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जीवन के हर क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही एआई : डॉ. विजय तिवारी


जीवन के हर क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही एआई : डॉ. विजय तिवारी


गोरखपुर, 27 अगस्त (हि.स.)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के पांचवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं महंत अवेद्यनाथ जी महाराज स्मृति सप्तदिवसीय व्याख्यानमाला के अंतर्गत गुरुवार को पंचकर्म ऑडिटोरियम में कैलिफोर्निया (अमेरिका) के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय तिवारी का व्याख्यान हुआ।

‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में भविष्य के डॉक्टर कैसे होने चाहिए’ विषय पर अपनी बात रखते हुए डॉ. विजय तिवारी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तेजी से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है और चिकित्सा क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। रोगों की पहचान, उपचार की योजना, चिकित्सा अनुसंधान तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और गति बढ़ाने में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक की अपनी सीमाएं हैं। करुणा, सहानुभूति, मानवीय स्पर्श, संवेदनशीलता, नेतृत्व और सेवा-भाव का स्थान एआई नहीं ले सकती। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान किया।

डॉ. तिवारी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण, स्वयं वह व्यक्ति होता है। उन्होंने भावी चिकित्सकों को आत्मबोध के साथ मानवीय संवेदनशीलता को चिकित्सा का आधार बनाने की प्रेरणा दी। उन्हाेंने कहा कि सफल डॉक्टर बनने के लिए केवल तकनीकी एवं चिकित्सकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीज को समझने, उसकी भावनाओं का सम्मान करने और संवेदनशीलता के साथ उपचार करने की क्षमता भी आवश्यक है।

इसी क्रम में गोरखपुर के वरिष्ठ चिकित्सक एवं लंदन में कार्य करने का व्यापक अनुभव रखने वाले डॉ. विवेक चंद्र ने ‘मेडिकल एथिक्स एंड प्रोफेशनलिज्म’ विषय पर चिकित्सा नैतिकता के चार प्रमुख सिद्धांतों की चर्चा की। रोगी की स्वायत्तता, हितकारिता, अहानिकरता और न्याय के आयामों को समझाते हुए उन्होंने कहा कि चिकित्सक को रोगी के निर्णय के अधिकार का सम्मान करते हुए उसके सर्वोत्तम हित में कार्य करना चाहिए। डॉ. विवेक चंद्र ने कहा कि उत्कृष्ट चिकित्सक बनने के लिए चिकित्सा ज्ञान और कौशल के साथ ईमानदारी, संवेदनशीलता, सम्मान, नैतिकता और पेशेवर जिम्मेदारी भी अनिवार्य हैं।

व्याख्यानमाला की अध्यक्षता करते हुए एमजीयूजी के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश गोयल ने कहा कि विद्यार्थी ऐसे संस्थान में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जहां आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ पारंपरिक ज्ञान, संस्कार और मानवीय मूल्यों को समान महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य केवल कुशल चिकित्सक बनाना नहीं, बल्कि संवेदनशील, नैतिक, जिम्मेदार और सेवाभावी चिकित्सकों का निर्माण करना भी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय