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कानून व्यवस्था को लेकर डीजीपी ने पुलिस मुख्यालय में की बैठक, दिए निर्देश

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कानून व्यवस्था को लेकर डीजीपी ने पुलिस मुख्यालय में की बैठक, दिए निर्देश


-जातीय वैमनस्यता फेलाने वालों पर कठोर कार्यवाही करें : पुलिस महानिदेशक-गोकशी एवं गो-तस्करी की घटनाओं में लिप्त लोगों पर कठोर कार्रवाई करें-थानों में अनावश्यक रूप से किसी व्यक्ति को न बैठने दें

लखनऊ, 08 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में ऑनलाइन माध्यम से उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक की।

पुलिस महानिदेशक ने सीमापार से संचालित आपराधिक एवं आतंकवादी नेटवर्क को सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को दुष्प्रेरित किए जाने की घटनाओं पर सतर्क निगरानी करने को कहा है। साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से जातीय वैमनस्यता फेलाने वालों पर भी कठोर कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि मीडिया को सही तथ्यों से तत्काल अवगत कराएं।

इस बैठक में मुख्य रूप से जन शिकायतों एवं आईजीआरएस प्रकरणों के निस्तारण, विवेचनाओं के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निष्पादन, डूबने से होने वाली दुर्घटनाओं, ई-सम्मन व ई-साक्ष्य के प्रभावी उपयोग और अन्य महत्वपूर्ण कानून-व्यवस्था से संबंधित विषय शामिल रहे।

डीजीपी ने क्राइम इन इंडिया 2024 की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के सकारात्मक परिणामों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक अपराध शीर्षक में बेहतर प्रदर्शन अधिकारियों और कर्मचारियों की कड़ी मेहनत एवं समर्पण का प्रतिफल है। मुझे विश्वास है कि पुलिस की टीम इसी लगन और परिश्रम के साथ कार्य करती रहेगी।

उन्होंने कहा कि आने वाली जन शिकायतों और आईजीआरएस प्रकरणों में चौकी स्तर पर ही नियमित सुनवाई करते हुए निस्तारण किया जाए। महिला सम्बन्धी एवं पारिवारिक शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष बल दिया। कानून व्यवस्था उत्पन्न करने वाली संवेदनशील घटनाओं में त्वरित कार्रवाई करे। इनके कारणों की समीक्षा कर पुनरावृत्ति रोकी जाये। कानून व्यवस्था उत्पन्न करने वाली घटनाओं में अधिकारी मीडिया को स्पष्ट, तथ्यात्मक एवं समयबद्ध पुलिस पक्ष उपलब्ध कराए। गम्भीर घटनाओं में परिक्षेत्र एवं जोन के वरिष्ठ अधिकारी भी स्वयं मौके पर पहुँचकर प्रभावी पर्यवेक्षण करें।

डीजीपी ने नव नियुक्त 60,244 आरक्षियों के प्रशिक्षण को लेकर कहा कि नवआरक्षियों का थाने की कार्यप्रणालियों के साथ-साथ बीट पुलिसिंग, फुट पेट्रोलिंग एवं जन संवाद में अधिकतम उपयोग किया जाए। अधिकारी नवआरक्षियों की मेस,आवास एवं प्रशिक्षण व्यवस्था का नियमित निरीक्षण करें तथा उनके साथ व्यक्तिगत संवाद स्थापित करें। समय-समय पर थाना प्रभारी व अन्य उच्चाधिकारी उनके साथ स्वयं मेस में भोजन करें ताकि बेहतर समन्वय बना रहे।

गोकशी एवं गो-तस्करी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाया जाये। गो-तस्करी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क एवं फॉरवर्ड-बैकवर्ड लिंक की पहचान कर कठोर कार्रवाई की जाये। इसके साथ लूट एवं हत्या की घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करते हुये समयबद्ध एवं प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाये।

डीजीपी ने ई-साक्ष्य एवं एसआईडी लिंकिंग में प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए सभी जनपदों को निरंतर सुधार के लिए निर्देशित किया गया। मॉनिटरिंग सेल को न्यायालयों के माध्यम से अधिकाधिक ई-समन जारी कराने तथा उनकी समयबद्ध तामीला सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

डीजीपी ने प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से चलायी गयीं जेएफडी योजना की समीक्षा करते हुये कहा कि इसके बेहतर परिणाम प्राप्त हो रहे हैं,इसमें निरंतर सुधार की आवश्यकता है। प्रदेश के 20 जनपदों में यातायात जाम की समस्या को दूर करने के उद्देश्य से चलायी गयी सी आरटीसी योजना के भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं,जिसमें और अधिक सुधार के निर्देश दिये गए।

आगे उन्होंने कहा कि नदी,नहर एवं जलाशयों में डूबने से होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए खतरनाक स्थानों की पहचान कर चेतावनी बोर्ड,बैरिकेडिंग एवं लाइफ जैकेट की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाये। स्थानीय पुलिस एवं एसडीआरएफ की टीमें नियमित जागरूकता एवं निगरानी अभियान चलाये।

डीजीपी ने कहा कि थानों पर किसी भी बंदी को बिना निगरानी के न रखा जाए तथा हवालात की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। क्षेत्राधिकारी एवं थाना प्रभारी यह सुनिश्चित करें कि थानों में अनावश्यक रूप से किसी व्यक्ति को न बैठायें। एसओपी का कड़ाई से पालन किया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक