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डीजीपी ने यूपी में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था को लेकर दिए निर्देश

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डीजीपी ने यूपी में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था को लेकर दिए निर्देश


— सड़क दुर्घटना की दृष्टि से प्रदेश के अतिरिक्त 100 संवेदनशील थानों को जेएफडी के दायरे में लाने की योजना

लखनऊ, 16 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में ऑनलाइन माध्यम से उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रमुख रुप से सभी जिलों के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस कप्तान और क्षेत्राधिकारी शामिल हुए।

बैठक में मुख्य रूप से ई-साक्ष्य के प्रभावी उपयोग, ई-सम्मन की संख्या में वृद्धि, आईजीआरएस प्रकरणों के निस्तारण, लम्बित विवेचनाओं के गुणवत्तापूर्ण एवं त्वरित निस्तारण के लिए अभियान, यक्ष एप की कार्यवाही की समीक्षा, जनप्रतिनिधियों एवं मीडिया से संवाद, ज़ीरो फ़ैटलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेएफडी) अभियान, विशेष अपराधों की समीक्षा तथा अन्य महत्वपूर्ण कानून-व्यवस्था से संबंधित विषयों की विस्तृत समीक्षा करते हुए डीजीपी ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

ई-साक्ष्य एवं डिजिटल विवेचना को बढ़ावा

डीजीपी ने सभी को अवगत कराया कि जनवरी 2028 से नए आपराधिक कानूनों का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना है, जिसके उपरान्त पारंपरिक लिखित साक्ष्यों के साथ ई-साक्ष्य पूरी तरह अनिवार्य हो जाएगा। अतः सभी पुलिस अधिकारियों एवं विवेचकों को गुणवत्तापूर्ण एवं पर्याप्त ई-साक्ष्य एकत्रित करने के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “ई-साक्ष्य विवेचना की आत्मा है” तथा वैज्ञानिक एवं तकनीक-आधारित साक्ष्य संकलन से विवेचना की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा, जिससे न्यायालयों में अपराधियों को दंडित कराने की सफलता दर में वृद्धि होगी ।

वर्तमान में विवेचकों द्वारा संकलित किए जा रहे ई-साक्ष्यों में पाई जाने वाली मात्रात्मक एवं गुणात्मक कमियों की पहचान तथा उनके प्रभावी प्रभावी निराकरण के लिए तकनीकी सेवाएं मुख्यालय द्वारा विकसित विशेष मॉनिटरिंग डैशबोर्ड का प्रस्तुतीकरण डीआईजी तकनीकी सेवाएं, आशीष तिवारी द्वारा किया गया ।

डीजीपी ने गोष्ठी में उपस्थित एवं वर्चुअल माध्यम से जुड़े समस्त सर्किल अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड की कार्यप्रणाली एवं तकनीकी पहलुओं को गहनता से समझें तथा अपने अधीनस्थ थानों में इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, जिससे ई-साक्ष्य संकलन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाया जा सके।

ई-समन की संख्या में वृद्धि

अदालती प्रक्रियाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए ई-समन की स्थिति की समीक्षा करते हुए जानकारी दी गयी कि राज्य में ई-समन का कुल प्रतिशत बढ़कर 28 प्रतिशत हो गया है, जिसे और बढ़ाये जाने की आवश्यक्ता है।

आईजीआरएस शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण पर विशेष बल

बैठक के प्रारम्भ में पुलिस महानिदेशक ने आईजीआरएस के अंतर्गत प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में केवल औपचारिकता न बरतते हुए शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किये जाने के लिए निर्देशित किया गया, जिससे आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।

लंबित विवेचनाओं के निस्तारण हेतु विशेष अभियान

विवेचनाओं की समीक्षा के दौरान डीजीपी ने प्रदेश में 60 दिन एवं 90 दिन से अधिक समय से लम्बित विवेचनाओं के निस्तारण हेतु आगामी तीन माह के भीतर अभियान चलाकर इन्हें न्यूनतम स्तर पर लाये जाने के लिए निर्देशित किया गया ।

‘यक्ष ऐप’ के माध्यम से अपराधियों की प्रभावी निगरानी पर बल

अपराधियों की निगरानी एवं सत्यापन के लिए विकसित ‘यक्ष ऐप’ की समीक्षा करते हुए पुलिस महानिदेशक ने निर्देशित किया कि सक्रिय एवं आदतन अपराधियों का नियमित सत्यापन तथा उनकी गतिविधियों की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसी अपराधी ने अपने मूल क्षेत्र से बाहर जाकर अपराध किए जाने की स्थिति में उसके मूल जनपद द्वारा की गई निगरानी एवं सत्यापन की भी समीक्षा की जाए । आवश्यकतानुसार जवाबदेही निर्धारित की जाए। इसके लिए रेंज स्तर पर नियमित पर्यवेक्षण एवं समीक्षा तंत्र को विकसित करने के निर्देश दिए गए।

सीयूजी मोबाइल पर कॉल रिस्पांस सुनिश्चित करने के निर्देश

डीजीपी ने निर्देशित किया कि सभी जनपदीय अधिकारियों, राजपत्रित अधिकारियों तथा थाना, चौकी प्रभारी सीयूजी मोबाइल सदैव सक्रिय रखे। उसमे आने वाली कॉल्स का यथासंभव रिस्पांस सुनिश्चित करें। राजकीय कार्यों में व्यस्तता के कारण कॉल रिसीव न कर पाने की स्थिति में अवसर मिलते ही जनप्रतिनिधियों, मीडिया एवं आमजन को कॉल बैक किया जाए, जिससे जनसंपर्क एवं संवाद व्यवस्था प्रभावी बनी रहे।

ज़ीरो फ़ैटलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेएफडी) व्यवस्था और सड़क सुरक्षा

समीक्षा के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए संचालित ज़ीरो फ़ैटलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेएफडी) अभियान के उत्साहजनक परिणाम सामने आए। जिन थानों में (जेएफडी) व्यवस्था लागू है, वहाँ सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 10 से 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके विपरीत, गैर- जेएफडी थानों में अपेक्षाकृत अधिक दुर्घटनाएँ होने के दृष्टिगत पुलिस डीजीपी ने प्रदेश के अन्य संवेदनशील थानों को भी इस अभियान के अंतर्गत शामिल करने के लिए अतिरिक्त 100 थानों को चिन्हित किए जाने के निर्देश दिए गए, ताकि सड़क सुरक्षा उपायों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

संवेदनशील अपराधों की समीक्षा

अपराध नियंत्रण की समीक्षा करते हुए डीजीपी ने कहा कि संवेदनशील श्रेणियों के अपराधों—महिला सम्बन्धी, गोकशी, गोतस्करी, अवैध धर्मांतरण आदि पर विशेष निगरानी रखते हुए इन प्रकरणों में प्रभावी विवेचना, समयबद्ध कार्रवाई तथा वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने तथा लंबित विवेचनाओं के शीघ्र निस्तारण एवं अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाये जाने के लिए निर्देशित किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक