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जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर डीजीपी का एक्शन, 09 जिलों के 10 थाना प्रभारियाें पर कार्रवाई

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जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर डीजीपी का एक्शन, 09 जिलों के 10 थाना प्रभारियाें पर कार्रवाई


लखनऊ, 27 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने मंगलवार को लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। इसमें प्रदेश के समस्त जोन के पुलिस अधिकारी, पुलिस कप्तान और पुलिस अफसर मौजूद थे। इस दाैरान उन्हाेंने जनशिकायतों के निस्तारण की भी समीक्षा की। डीजीपी ने कहा कि अधिकारी जन शिकायतों के समयबद्ध समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेकर निस्तार करें, ताकि शिकायतकर्ताओं को जनपदीय अथवा पुलिस मुख्यालय पर आने की आवश्यकता ना पड़े। लापरवाही बरतने पर 10 थाना प्रभारियाें पर कार्रवाई की गई है।

बैठक में अतिरिक्त थाने एवं चौकी पर जनसुनवाई को और बेहतर करने, भूमि एवं अन्य स्थानीय विवादों में विभागीय समन्वय तथा संवेदनशील मामलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की गई। डीजीपी ने कहा कि आईजीआरएस, जनसुनवाई, मुख्यमंत्री संदर्भ, पीजी पोर्टल और अन्य माध्यमों से प्राप्त प्रत्येक शिकायत को प्राथमिकता से सुना जाए। किसी भी शिकायत को दर्ज करने से मना न किया जाए। शिकायत के निस्तारण के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय हो। लंबित रहने का कारण दर्ज किया जाए और शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति से अवगत कराया जाए। शिकायतों की संख्या एवं प्रकृति का विश्लेषण कर वृद्धि के कारणों की पहचान की जाए। पंजीकरण और निस्तारण के आंकड़ों की शुचिता बनाए रखी जाए। प्रत्येक एसएसपी, एसपी कार्यालय में केंद्रीय निगरानी डेस्क स्थापित की जाए। यह डेस्क प्रतिदिन प्राप्त, निस्तारित और लंबित शिकायतों का विवरण रखे तथा संबंधित थाना/चौकी से लंबित मामलों का फॉलो-अप करे।

नागरिकों के प्रति सुलभ व्यवहार और जवाबदेही

डीजीपी ने कहा कि थाने या चौकी पर आने वाले प्रत्येक फरियादी की बात धैर्यपूर्वक और सम्मान के साथ सुनी जाए। अभद्रता, उपेक्षा, अनावश्यक टालमटोल, पक्षपात या भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

भूमि विवादों की सूची और राजस्व विभाग से समन्वय

डीजीपी ने कहा कि प्रत्येक थाने में शीर्ष 10 भूमि विवादों की सूची तैयार की जाए। इनके निस्तारण की निगरानी संबंधित एसीपी/सीओ करें और एसडीएम के साथ समन्वय स्थापित करें। सूची में शामिल विवादों का निस्तारण होने पर अगले 10 प्रचलित भूमि विवादों को सूची में लेकर समाधान की कार्रवाई शुरू की जाए। इसके अलावा पारिवारिक प्रकृति के विवादों में संबंधित पक्षों के बीच संवाद से समाधान का प्रयास किया जाए। अवैध कब्जे या कमजोर व्यक्तियों को बेदखल करने के मामलों में कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो। न्यायालय में विचाराधीन मामलों में न्यायालयीन प्रक्रिया का सम्मान करते हुए पीड़ित की सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

यक्ष बीट रिपोर्ट के आधार पर विवादों की पहचान

यक्ष बीट रिपोर्ट में दर्ज भूमि विवादों को संबंधित थाने की विवाद सूची और निगरानी व्यवस्था में शामिल किया जाए। बीट स्तर पर प्राप्त जानकारी का सत्यापन कर विवाद की गंभीरता का आकलन किया जाए और आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को समय से अवगत कराया जाए।

संवेदनशील विवादों की विशेष टीमें और दैनिक निगरानी

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि प्रत्येक थाने में क्षेत्र के शीर्ष 10 प्रचलित विवादो की सूची बनाई जाए। इनके समाधान के लिए थाना, सर्किल और जनपद स्तर पर विशेष टीमें गठित करे। जिन विवादों में पूर्व में दोनों पक्षों की ओर से अभियोग पंजीकृत हुए हों, मारपीट की घटना हुई हो अथवा जातिगत या सांप्रदायिक संवेदनशीलता हो, उन्हें प्राथमिकता पर रखा जाए।संवेदनशील विवादों का थाना, सर्किल और जनपद स्तर पर प्रतिदिन अनुश्रवण हो। पुलिस अधीक्षक के स्तर पर गठित विशेष डेस्क भी प्रतिदिन स्थिति और कार्रवाई की समीक्षा करे।

शांति भंग की आशंका वाले मामलों में निरोधात्मक कार्रवाई

उन्होंने कहा कि जहां किसी विवाद में शांति भंग या लोक-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो, वहां संबंधित तथ्य सक्षम कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत कर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 126 के तहत कार्यवाही की प्रक्रिया समय से शुरू कराई जाए। धारा 135 के तहत आवश्यक जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

मुचलके की शर्तों का उल्लंघन होने पर संबंधित तथ्य और साक्ष्य सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं, ताकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 141 के तहत विधि के अनुसार आगे की कार्रवाई हो सके।

जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने पर कठोर कार्यवाही

जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर डीजीपी ने थानाध्यक्षों को प्रत्यावर्तित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही करने के निर्देश दिये गए जो निम्नवत हैं ,जिनमें लखनऊ के बाबू बनारसीदास (बीबीडी) थाने के प्रभारी, लखीमपुर खीरी के मैलानी और फरधान, उन्नाव के सोहरामऊ, एटा के जसरथपुर, आगरा के लोहमंडी, प्रतापगढ़ के महेशगंज, बदायूं के उसावा, बिजनौर के चांदपुर और मथुरा के जैत थानाध्यक्ष हैं।

लम्बित जन शिकायतों की समीक्षा कर 03 दिवस में आख्या

जनपदीय पुलिस प्रभारी थाने एवं चौकी स्तर पर लम्बित जन शिकायत, उनके लम्बित रहने के कारण एवं लापरवाह पुलिस कर्मियों की समीक्षा एवं कार्यवाही कर रेंज एवं जोन के माध्यम से पुलिस महानिदेशक को आख्या प्रेषित करेंगे।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि शिकायतों और विवादों का समय से, निष्पक्ष एवं संवेदनशील तरीके से निस्तारण पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि शिकायतकर्ता को न्यायोचित सहायता मिले और संभावित विवादों में समय रहते कार्रवाई कर कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए और लापरवाही बरतने वाले थानाध्यक्षों पर कठोर कार्यवाही की जाय।

हिन्दुस्थान समाचार / दीपक