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आईजीआरएस प्रकरणों के निस्तारण की समीक्षा में एसडीएम से लेकर तहसीलदार तक की दिखी लापरवाही, अब हाेंगे दंडित

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आईजीआरएस प्रकरणों के निस्तारण की समीक्षा में एसडीएम से लेकर तहसीलदार तक की दिखी लापरवाही, अब हाेंगे दंडित


देवरिया, 19 जून (हि.स.) । उत्तर प्रदेश के देवरिया के जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने मई के आईजीआरएस प्रकरणों के निस्तारण की समीक्षा में शुक्रवार को पाया कि 50 प्रतिशत से कम संतुष्ट फीडबैक तथा 80 प्रतिशत से कम प्रकरणों में ही आवेदक से वार्ता की गयी है, जिसके कारण जनपद की रैंकिंग प्रभावित हो रही है। ऐसे अधिकारियों को कार्यप्रणाली में सुधार लाये जाने के साथ आईजीआरएस प्रकरणों को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ प्राधानों का अनुपालन करते हुए निस्तारित किये जाने के निर्देश दिये हैं।

उन्होंने बताया कि समीक्षा में खण्ड विकास अधिकारी भटनी द्वारा आईजीआरएस के प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण नहीं किये जाने पर चेतावनी दी गयी है। साथ ही 50 प्रतिशत से कम संतुष्ट फीडबैक एवं 80 प्रतिशत प्रकरणों में ही वार्ता किये जाने वाले विभागों के लगभग 97 अधिकारियों को भी आगाह किया गया है कि कार्यप्रणाली में सुधार लाते हुए गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने बताया कि जिन अधिकारियों के फीडबैक संतोषजनक नहीं पाये गये हैं, उनमें समस्त उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, अधिशासी अधिकारी, अधिशासी अभियंता, खण्ड शिक्षा अधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारीगण, चकबन्दी अधिकारी, नियत प्राधिकारी स्थानीय निकाय, उप संचालक चकबन्दी, एलडीएम बैंक, खान निरीक्षक (खनिज), सोशल सेक्टर से जुड़े अधिकारी, जिला आबकारी अधिकारी, जिला उपायुक्त मनरेगा, जिला उपायुक्त स्वतः रोजगार, जिला कमांडेंट होमगार्ड, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला सेवायोजन अधिकारी, परियोजना अधिकारी डूडा, पूर्ति अधिकारी, प्रभारी अधिकारी स्थानीय निकाय, प्रभारी चिकित्साधिकारी, बंदोबस्त अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, वरिष्ठ निरीक्षक बाट एवं माप, सब-रजिस्ट्रार, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, सामान्य प्रबंधक उद्योग सहित लगभग 97 अधिकारियों के असंतुष्ट फीडबैक के लिये आगाह किया गया है कि आईजीआरएस प्रकरणों का निस्तारण नियमानुसार स्पॉट मेमो, आवेदक से संपर्क करना, संतुष्टता/असंतुष्टता के संबंध में पोर्टल पर भी उपलब्ध विकल्पों का अंकन सुनिश्चित करने के साथ करेंगे, ताकि आईजीआरएस प्रणाली की रैंकिंग में सुधार हो सके। अन्यथा संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जााएगी ।

हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक