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गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 85 मेधावियों को मिले 172 पदक, राज्यपाल ने कहा—डिग्री पहचान दिलाती है, चरित्र सम्मान'

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गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 85 मेधावियों को मिले 172 पदक, राज्यपाल ने कहा—डिग्री पहचान दिलाती है, चरित्र सम्मान'


गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 85 मेधावियों को मिले 172 पदक, राज्यपाल ने कहा—डिग्री पहचान दिलाती है, चरित्र सम्मान'


गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 85 मेधावियों को मिले 172 पदक, राज्यपाल ने कहा—डिग्री पहचान दिलाती है, चरित्र सम्मान'




-74 प्रतिशत पदकों पर छात्राओं का रहा वर्चस्व

गोरखपुर, 06 अगस्त (हि.स.)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का 45वाँ दीक्षांत समारोह गुरुवार को विश्वविद्यालय के नवीनीकृत 'दीक्षा भवन' प्रेक्षागार में भव्य वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में पद्मभूषण डॉ. वी.के. सारस्वत तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी उपस्थित रहीं। समारोह में शिक्षा, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का प्रभावी संदेश दिया गया।

समारोह का शुभारंभ कुलाधिपति के आगमन के साथ एचपीवी टीकाकरण अभियान के शुभारंभ से हुआ। इसके उपरांत उन्होंने कुलाधिपति वाटिका में वृक्षारोपण किया, विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित एवं नवीनीकृत भवनों का लोकार्पण किया तथा विभिन्न विभागों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विद्वत् पदयात्रा के साथ मुख्य दीक्षांत समारोह प्रारंभ हुआ, जबकि परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की पर्यावरण संरक्षण पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

85 मेधावियों को 172 पदक, छात्राओं का दबदबा

दीक्षांत समारोह में 85 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 172 पदक प्रदान किए गए। इनमें 80 विश्वविद्यालय पदक और 92 डोनर्स पदक शामिल रहे। सम्मानित विद्यार्थियों में 63 छात्राएँ और 22 छात्र रहे। कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 25 स्वर्ण पदक प्रदान किए, जबकि शेष पदक मुख्य अतिथि डॉ. वी.के. सारस्वत ने वितरित किए। इस वर्ष भी छात्राओं ने अपनी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों से नया कीर्तिमान स्थापित किया।

'डिग्री पहचान दिलाती है, चरित्र सम्मान'

अपने अध्यक्षीय संबोधन में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि डिग्री व्यक्ति को पहचान दिलाती है, लेकिन उसका चरित्र उसे सम्मान दिलाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग समाज, राष्ट्र और मानवता के कल्याण के लिए करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गोरखपुर भगवान बुद्ध, गुरु गोरखनाथ, संत कबीर और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रेरणादायी भूमि है। युवाओं को अंत्योदय की भावना अपनाते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने का संकल्प लेना चाहिए।

कुलाधिपति ने बताया कि इस वर्ष विश्वविद्यालय ने 74,481 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की हैं, जिनमें दो-तिहाई से अधिक छात्राएँ हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों की सफलता उच्च शिक्षा में बढ़ती भागीदारी का प्रमाण है। साथ ही उन्होंने छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन में अंतर का गंभीर अध्ययन करने की आवश्यकता भी बताई।

उन्होंने विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिलॉकर सुविधा, डिजिटल लाइब्रेरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रयोगशालाओं तथा रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों की सराहना की। उन्होंने नशामुक्त भारत अभियान, गोद लिए गए गाँवों में विश्वविद्यालय की सामाजिक पहल तथा बच्चों की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

2047 के विकसित भारत के नेतृत्वकर्ता बनें युवा : डॉ. वी.के. सारस्वत

मुख्य अतिथि पद्मभूषण डॉ. वी.के. सारस्वत ने कहा कि उपाधि केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में विकसित भारत के निर्माण में आज के युवा नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक सोच, नवाचार, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम टेक्नोलॉजी, जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स एवं स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, नैतिकता और सेवा भावना ही स्थायी सफलता का आधार हैं।

युवा रोजगार खोजने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें : रजनी तिवारी

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि छात्राओं ने अपनी प्रतिभा से नई मिसाल कायम की है। उन्होंने युवाओं से नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के माध्यम से रोजगार सृजक बनने तथा विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान की ओर बढ़ रहा विश्वविद्यालय : कुलपति

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय को यूजीसी श्रेणी-1 तथा नैक से ए डबल प्लस ग्रेड प्राप्त है। पहली बार विश्वविद्यालय ने एनआईआरएफ, क्यूएस एशिया, क्यूएस दक्षिण एशिया, टाइम्स हायर एजुकेशन तथा नेचर इंडेक्स जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक रैंकिंग में स्थान बनाया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में लगभग 231.61 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है तथा प्रधानमंत्री उषा योजना के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है।

सामाजिक उत्तरदायित्व का भी मिला संदेश

दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गाँवों के प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित किया गया। गोरखपुर एवं कुशीनगर के चयनित आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरित की गईं। एचपीवी टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्रशासन, स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए तथा प्राथमिक विद्यालयों को पुस्तकें भेंट की गईं। 45वें दीक्षांत समारोह ने केवल उपाधियों का वितरण ही नहीं किया, बल्कि शिक्षा, संस्कार, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और विकसित भारत के संकल्प को भी नई ऊर्जा प्रदान की।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय