धर्मांतरण की रोकथाम के लिए मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में गठित हाे 'विशेष निगरानी सेल' : आनंदीबेन पटेल
लखनऊ, 11 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मेडिकल संस्थानों में अवैध रूप से धर्मांतरण और मत्तांतरण की चलने वाली गतिविधियों पर प्रभावी रोकथाम के लिए राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने प्रदेश के मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में प्रलोभन और दबाव बनाकर धर्मांतरण कराने वाले नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की समय रहते चिन्हित कर धरपकड़ के लिए विशेष निगरानी सेल गठित किए जाने के कड़े आदेश जारी किए हैं।
यह निर्णय बीते साल 2025 में प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) और संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में महिला मेडिकल स्टॉफ के साथ सामने आए कथित धर्मांतरण के मामलों की गंभीरता को देखते हुए लिया गया है। राजभवन (अब जनभवन) के इस निर्णय के बाद, अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय ने अपने सभी संबद्ध संस्थानों को तुरंत इस निगरानी सेल गठित कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश जारी किया है।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के विशेष कार्याधिकारी डॉ सुधीर एम. बोबड़े के मुताबिक, मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में यह विशेष निगरानी सेल मुख्य रूप से धर्मांतरण की रोकथाम, कॉलेज परिसर की निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेगा। विद्यार्थियों, रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल स्टॉफ (विशेषकर महिलाओं) के बीच जागरुकता अभियान चलाएगा। उनकी किसी भी शिकायत का तुरंत संज्ञान लेकर जांच, तथ्यों को संबंधित अधिकारियों को सूचित करने के साथ ही वैधानिक कार्यवाही अमल में लाने की व्यवस्था भी इसमें शामिल होगी।राज्यपाल ने सभी संस्थानों में इस सेल को प्रभावी बनाने और अनुपालन रिपोर्ट समयबद्ध रूप से मांगने के निर्देश दिए हैं।
केजीएमयू के डॉक्टर पर महिला डॉक्टर ने लगाया था प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक शोषण और धर्मांतरण का आरोप
उल्लेखनीय है कि बीते साल 2025 के अंतिम माह दिसंबर में केजीएमयू में एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने अपने सहयोगी डॉक्टर रमीजुद्दीन मलिक उर्फ रमीज मलिक पर प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक शोषण और फिर धर्मांतरण का दबाव बनाने का आरोप लगाया था। इस मामले में पीड़िता ने संस्थान के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन पीड़ित के मुताबिक आरोपित डाक्टर के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया। जिसके चलते पीड़िता ने आत्महत्या करने का प्रयास भी किया। बाद में प्रकरण की जांच में खुलासा हुआ कि इस मामले में ब्लैकमेलिंग, नकली कागजात बनाने और एक बड़े गिरोह के शामिल होने का अंदेशा है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार संजय गांधी पीजीआई अस्पताल में भी एक व्यक्ति के अचानक लापता होने का मामला सामने आया था। इस प्रकरण ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी थी। इन दोनों बड़े घटनाक्रम की वजह से यह साफ हो गया कि प्रदेश के मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों के अंदर सुरक्षा बेहतर करना और वहां चल रहीं गतिविधियों पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है। इसके चलते ही उनमें धर्मांतरण की रोकथाम के लिए विशेष निगरानी सेल बनाना अति आवश्यक है।
धर्मांतरण की गतिविधियों की निगरानी के लिए राज्यपाल के निर्णय को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता हीरो बाजपेई ने बताया कि मेडिकल शिक्षा की गरिमा बनाए रखने और युवा अभ्यर्थियों (विशेषकर महिला) की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया जाना आवश्यक था। विपक्ष इस फैसले का भी विरोध कर रहा है क्योंकि इससे भी उनका वोट बैंक प्रभावित हो रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

