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भूली परंपराओं को बार-बार याद करना ही संघ की सफलता का राज : रमेश

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भूली परंपराओं को बार-बार याद करना ही संघ की सफलता का राज : रमेश


- संघ के शताब्दी वर्ष पर नरायनपुर में प्रबुद्ध जन संगोष्ठी आयोजित

मीरजापुर, 17 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ के जिला चुनार के नेतृत्व में गुरुवार को नरायनपुर स्थित एक स्कूल के सभागार में प्रबुद्ध जन संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य वक्ता काशी प्रांत के प्रांत प्रचारक रमेश ने संघ की स्थापना से लेकर वर्तमान समय तक की यात्रा और उसके उद्देश्यों पर विचार रखे। इस दौरान उपस्थित लोगों को संघ शताब्दी वर्ष पुस्तक भी भेंट की गई।

रमेश ने कहा कि वर्ष 1925 में नागपुर से निकली विचारधारा की धारा आज भी निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास के विभिन्न कालखंडों में बाहरी आक्रमणों और सामाजिक विभाजन के कारण देश को नुकसान उठाना पड़ा। जाति और उपजातियों में बंटने से समाज कमजोर हुआ तथा शिक्षा और शासन व्यवस्था भी प्रभावित हुई।

उन्होंने कहा कि समाज को संगठित और दोषमुक्त बनाने के लिए व्यक्ति निर्माण जरूरी है। इसी उद्देश्य से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने शाखा की शुरुआत की थी। जो बातें और परंपराएं हम भूल चुके हैं, उन्हें बार-बार याद करते रहना ही संघ की सफलता का राज है। उन्होंने कहा कि शाखा के माध्यम से व्यक्ति में राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित होती है।

प्रांत प्रचारक ने कहा कि संघ का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने दावा किया कि संघ से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां प्रतिदिन, साप्ताहिक और मासिक स्तर पर संचालित हो रही हैं। भाषा को लेकर विरोध कम हो रहा है और समाज में भारत के प्रति अपनत्व की भावना मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि सभी भारतीय एक ही धारा के बंधु हैं।

संगोष्ठी की अध्यक्षता अधिवक्ता नागेश सिंह ने की। प्रस्तावना सुरेंद्र सिंह, आभार गौतम जी और संचालन हरिशंकर सिंह ने किया।

कार्यक्रम में विधायक अनुराग सिंह, विधायक रमाशंकर सिंह, रामसकल सिंह, अनमोल सिंह, विधायक प्रतिनिधि आलोक सिंह, सत्येंद्र सिंह, ग्रापए प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ सिंह, संजय भाई पटेल, राकेश सिंह, रामकुमार दादा, संतोष चौरसिया, अनिल सिंह, अजय जायसवाल, शिव जायसवाल, अब्दुल कलाम अंसारी, डॉ. अजीत सिंह, आनंद गुप्ता समेत बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा