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निवेश से आगे ग्लोबल फ्यूचर की ओर बढ़ रही यूपी-जापान साझेदारी : मुख्यमंत्री योगी

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निवेश से आगे ग्लोबल फ्यूचर की ओर बढ़ रही यूपी-जापान साझेदारी : मुख्यमंत्री योगी


-इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट के समापन सत्र को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित

लखनऊ, 21 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश और जापान के रिश्ते अब केवल निवेश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि लॉन्ग-टर्म, ट्रस्ट-बेस्ड पार्टनरशिप के रूप में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे। जापान के प्रिसिजन और टेक्नोलॉजी को उत्तर प्रदेश के स्केल, युवा शक्ति और टैलेंट से जोड़ते हुए प्रदेश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में काम होगा।

शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट के वेलेडक्टरी सेशन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान उत्तर प्रदेश के लिए केवल इन्वेस्टर नहीं, बल्कि को-क्रिएटर है। एमओयू को प्रोडक्शन, प्रोडक्शन को ग्लोबल एक्सपोर्ट और निवेश को रोजगार में बदलना सरकार का लक्ष्य है। 2047 के भारत के उद्योग आज डिजाइन हो रहे हैं और उत्तर प्रदेश चाहता है कि जापान के साथ मिलकर इन उद्योगों का भविष्य तैयार किया जाए।

जापानी भाषा में मुख्यमंत्री ने दिया दोस्ती और साझेदारी का संदेश

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जापानी भाषा का प्रयोग करते हुए जापानी प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पूर्व जापान की धरती पर जो संकल्प लिया गया था, आज लखनऊ की धरती पर उसे साकार रूप लेते हुए देखा जा रहा है। यह भारत-जापान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और यामानाशी के संबंधों में भी नई साझेदारी के युग की शुरुआत है। जापान ने दुनिया को दिखाया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद डिसिप्लिन, विल पावर, हाई क्वालिटी स्टैंडर्ड, इनोवेशन और नेशन फर्स्ट की भावना के साथ सही दिशा में प्रयास किया जाए तो कोई भी चुनौती मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। जापान आज विश्व की प्रमुख इकोनॉमिक एंड इंडस्ट्रियल पावर के रूप में स्थापित है। जापान और उत्तर प्रदेश मिलकर कार्य करेंगे।

600 करोड़ के फंड से बढ़ेगा जापानी निवेश

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले तीन दिनों में जापानी डेलीगेशन के साथ हुई बातचीत में वर्किंग रिलेशनशिप मजबूत करने, उत्तर प्रदेश की पॉलिसीज और बिजनेस एनवायरमेंट को समझने तथा निवेश के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। जापानी प्रतिनिधियों ने प्रदेश में पॉलिसी रिफॉर्म और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में हुए सुधारों की सराहना की है। उन्होंने सीमलेस अप्रूवल, लैंड अलॉटमेंट की सरल प्रक्रिया और रिड्यूस्ड कंप्लायंसेज को सकारात्मक बदलाव बताया। वहीं मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब, इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर्स, इंडस्ट्रियल पार्क्स और बेहतर कनेक्टिविटी को निवेश के लिए महत्वपूर्ण सकारात्मक पहलू माना।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सुविधाओं के कारण प्रदेश में निर्मित उत्पादों की देश के अलग-अलग हिस्सों में सीमलेस मूवमेंट संभव हो रही है। यामानाशी के साथ सहयोग को अब मजबूत और संस्थागत व्यवस्था में बदला जाएगा। इन्वेस्ट यूपी में डेडिकेटेड यामानाशी डेस्क स्थापित की जाएगी, जो यामानाशी सरकार, वहां के उद्योगों और निवेशकों के साथ निरंतर समन्वय करेगी। दोनों पक्ष इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स, इंडस्ट्री की आवश्यकताओं, अप्रूवल्स और सामने आ रही चुनौतियों की हर 90 दिन में कोऑर्डिनेशन के साथ रिव्यू करेंगे, ताकि किसी भी स्तर पर कोई गैप न रहे। मुख्यमंत्री ने यामानाशी के गवर्नर को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने यामानाशी की एमएसएमई कंपनियों के उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए 600 करोड़ रुपये का फंड घोषित किया है। यह उत्तर प्रदेश में जापानी उद्योग के बढ़ते विश्वास का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

यामानाशी मॉडल को जापान के अन्य प्रिफेक्चर्स तक विस्तार देंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि फरवरी 2026 की जापान यात्रा के दौरान जापानी सीईओज, बिजनेस एसोसिएशंस और इंडस्ट्री डेलिगेशंस के साथ व्यापक चर्चा हुई थी। इन चर्चाओं में उत्तर प्रदेश सरकार और जापान के अन्य प्रीफेक्चर्स के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी थी। अब यामानाशी के साथ विकसित मॉडल को जापान के अन्य प्रिफेक्चर्स तक भी विस्तार दिया जाएगा।

ग्रीन हाइड्रोजन पर मिलकर करेंगे काम

योगी ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी यामानाशी के साथ सहयोग को अगले चरण तक ले जाया जाएगा। आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं। इसी मॉडल की तर्ज पर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जा सकते हैं, ताकि रिसर्च एंड डेवलपमेंट, न्यू टेक्नोलॉजी के एडॉप्शन और क्लीन एनर्जी में इनोवेशन को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। यामानाशी के साथ एक पायलट प्रोजेक्ट विकसित करने पर सहमति हुई है, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर इंप्लीमेंट करेगी। इसके लिए भारतीय और जापानी कंपनियों के बीच टेक्नोलॉजी एवं बिजनेस पार्टनरशिप विकसित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) की स्थापना के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। उन्होंने जापानी जीसीसी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में आने, निवेश करने और अपना बिजनेस सेटअप करने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि इस विषय में एक एमओयू भी संपन्न हुआ है। प्रदेश का लक्ष्य केवल निवेश लाना नहीं, बल्कि जापान के साथ लॉन्ग-टर्म, ट्रस्ट-बेस्ड पार्टनरशिप विकसित करना है।

इस अवसर पर यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो नागासाकी, यामानाशी प्रीफेक्चर के वाइस गवर्नर जुनिची इशिदेरा, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, यूपी ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार और गवर्नर यामानाशी के साथ आए उच्चस्तरीय डेलीगेशन के इंडस्ट्री लीडर्स, सीईओज व अन्य अतिथिगण उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला