पुलिस की जमीन पर था माफिया का कब्जा, खाली कराकर बनाया स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट : मुख्यमंत्री
-डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग 'त्रिवेणी' में बोले सीएम योगी, उत्तर प्रदेश पहचान के संकट से निकलकर देश की टॉप-3 इकोनॉमी में शामिल
लखनऊ, 15 जून (हि. स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नौ साल पहले उत्तर प्रदेश की हालत यह थी कि राजधानी में पुलिस की जमीन पर कुख्यात माफिया ने कब्जा कर रखा था। तत्कालीन सरकार के सरंक्षण में वह माफिया इतना शक्तिशाली हो गया था कि पुलिस की हिम्मत नहीं थी कि वह अपनी जमीन खाली करा सके। लेकिन, डबल इंजन सरकार का बुलडोजर देखते ही माफिया ने जमीन सरेंडर कर दी। आज उसी जमीन पर स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की भव्य इमारत खड़ी है।
लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग 'त्रिवेणी' उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा, सुशासन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर राष्ट्रीय स्तर के विमर्श का मंच बना। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके समापन सत्र को संबोधित करते हुए कंटेंट क्रिएटर्स से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने मीडिया की भूमिका, कानून व्यवस्था, फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस कॉरिडोर, पर्यटन, मेडिकल शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर विस्तार से अपने विचार रखे।
माफिया के कब्जे वाली भूमि पर बना स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट
मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में स्थापित स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट केवल एफएसएल और साइबर सिक्योरिटी का केंद्र नहीं है, यह आधुनिक तकनीकों से जुड़े सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स का भी प्रमुख संस्थान बन चुका है। उन्होंने नौ वर्ष पुराना किस्सा सुनाते हुए कहा कि यह भूमि उत्तर प्रदेश पुलिस की थी, जिस पर लखनऊ के एक कुख्यात माफिया का कब्जा था। वर्ष 2017 में फॉरेंसिक सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता महसूस होने पर इस भूमि को मुक्त कराने की कार्रवाई की गई। बुलडोजर कार्रवाई के बाद माफिया ने स्वयं भूमि सरकार को सौंप दी और आज उसी स्थान पर विद्यार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। नए आपराधिक कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक की सजा वाले मामलों में फॉरेंसिक एविडेंस अनिवार्य है और उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में मोबाइल फॉरेंसिक वैन की व्यवस्था भी की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने करीब 200 एकड़ लैंड मुफ्त उपलब्ध कराई। ब्रह्मोस की ताकत देखिए, जिस दिन पहली ब्रह्मोस मिसाइल निकली, उसके तीसरे दिन पाकिस्तान पर बरस पड़ी थी। जमीन की कीमत क्या है, राष्ट्र की सुरक्षा से बढ़कर क्या हो सकता है ? यह भूमि मुफ्त में जरूर दी गई है, लेकिन जब प्रतिवर्ष लगभग 150 ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्माण होगा तो उत्तर प्रदेश को लगभग 135 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में प्राप्त होंगे। उत्तर प्रदेश डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के तहत लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट में रक्षा उत्पादन की नई संभावनाएं विकसित हुई हैं। जहां 20 से 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद थी, वहीं अब तक 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश पहचान के संकट से निकलकर देश की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। देश के कुल एक्सप्रेसवे में 60 प्रतिशत यूपी में मौजूद हैं। चार लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क विकसित किया गया है। सभी जिला मुख्यालयों को फोरलेन कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या 41 से बढ़कर 83 हो गई है और प्रत्येक जनपद में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में कार्य हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश की नई पहचान वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट, वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन और वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज से बन रही है। उन्होंने महाकुंभ के दौरान तमिलनाडु से आए श्रद्धालुओं की सहायता करने वाले चित्रकूट के ग्रामीणों का उदाहरण देते हुए कहा कि यही 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की वास्तविक भावना है।
योगी ने कहा कि यूपी ने पिछले नौ वर्ष के अंदर प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में एक लंबी यात्रा तय की है। पहचान के संकट से मुक्त हुआ है, बीमारू राज्य की श्रेणी से उभर कर भारत की इकोनॉमी का ब्रेकथ्रू बना, हर एक सेक्टर में अपनी ताकत का एहसास करवाया है। अब यूपी देश के अंदर पिछड़े राज्यों में नहीं गिना जाता, बल्कि देश की टॉप-3 इकोनॉमी में आता है। हर एक वेलफेयर स्कीम में यूपी का नाम शीर्ष राज्यों में मिलेगा।
अंत में सत्य की ही जीत होती है
वर्तमान परिदृश्य में मीडिया की भूमिका पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ नकारात्मक को समाचार मानना उचित नहीं। न्यूज़ को न्यूज़ के रूप में प्रस्तुत करना ही मीडिया का काम है, उसमें व्यक्तिगत विचार नहीं शामिल होने चाहिए। न्यूज में व्यूज मिक्स नहीं होने चाहिए। व्यूज़ के लिए एक अलग से कॉलम होता है, उसमें अपने विचार दे सकते हैं। आप केवल कंटेंट क्रिएटर नहीं हैं, आप ओपिनियन मेकर के रूप में समाज को बहुत कुछ दे सकते हैं। समाज के ओपिनियन को सच के साथ जोड़ने का साहस दे सकते हैं। सच के साथ चलना अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती होती है, लेकिन अंततः 'सत्यमेव जयते' यानी सत्य की ही विजय होती है। यदि समाज का हर व्यक्ति अपनी ज़िम्मेदारियों का अहसास कर ले, तो सकारात्मक परिणाम अवश्य आएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला

