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अधिवक्ताओं को कैशलेश इलाज की सुविधा देने को बनाएंगे व्यवस्था : मुख्यमंत्री योगी

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अधिवक्ताओं को कैशलेश इलाज की सुविधा देने को बनाएंगे व्यवस्था : मुख्यमंत्री योगी


अधिवक्ताओं को कैशलेश इलाज की सुविधा देने को बनाएंगे व्यवस्था : मुख्यमंत्री योगी


अधिवक्ताओं को कैशलेश इलाज की सुविधा देने को बनाएंगे व्यवस्था : मुख्यमंत्री योगी


अधिवक्ताओं को कैशलेश इलाज की सुविधा देने को बनाएंगे व्यवस्था : मुख्यमंत्री योगी


अधिवक्ताओं को कैशलेश इलाज की सुविधा देने को बनाएंगे व्यवस्था : मुख्यमंत्री योगी


गोरखपुर, 28 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिवक्ताओं को बड़ा आश्वासन देते हुए कहा कि वह, अधिवक्ताओं को कैशलेश इलाज की सुविधा देने के लिए तैयार हैं। इसके लिए एक व्यवस्था बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं को देश और समाज का सजग प्रहरी बताते हुए आह्वान किया कि वे देश और समाज के खिलाफ होने वाली साजिशों का प्रतिकार करने के लिए चौकन्ना रहें।

मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट गोरखपुर की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के परिचय समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को बधाई दी और आजादी के आंदोलन से लेकर वर्तमान कालखंड में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। योगी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के तीनों स्तम्भ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका ने एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए और लक्ष्मण रेखा के भीतर संविधान के प्रति निष्ठा से कार्य करते हुए सामान्य नागरिक को लाभान्वित किया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और अन्य स्तम्भों के बीच संवाद को बढ़ाने में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अधिवक्ता, न्यायपालिका तक नागरिकों की बात पहुंचाने और समाधान निकालने के साथ नागरिक और न्यायपालिका के बीच विश्वास का संबंध बनाने में अपनी भूमिका का निर्वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता सिर्फ मुकदमा नहीं लड़ते बल्कि नागरिकों के विश्वास के प्रतीक होते हैं। वह समाज के विधिक सलाहकार और संविधान के सारथी की भूमिका में होते हैं।

गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध ढंग से सर्वसुलभ न्याय से स्थापित होता है विधि का शासन

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधि का शासन तभी स्थापित होता है जब न्याय गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध ढंग से सर्वसुलभ होता है। गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और सर्वसुलभ न्याय के सबसे बड़े वाहक अधिवक्ता ही होते हैं। उन्होंने कहा कि समयबद्ध तरीके से न्याय सर्वसुलभ कराने के लिए देश में जो तीन नए कानून आए, उन्हें सफलतापूर्वक लागू कराने में सबसे बड़ा योगदान अधिवक्ताओं ने दिया है।

योगी ने कहा कि बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरी दुनिया में भारत के प्रति जो आकर्षण बढ़ा है, उसे कई ताकतें स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत बॉटम फाइव से टॉप फाइव देशों में आ चुका है। अब टॉप तीन में आने को तत्पर है। भारत की इस प्रगति यात्रा को रोकने के लिए अनेक षड्यंत्र किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर और फेंक एकाउंट्स के जरिए जातीय समूहों को आपस में लड़ाने, क्षेत्र, मत, भाषा के आधार पर समाज को विभाजित करने का प्रयास किया जाएगा। साजिशन न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका पर अंगुली उठाने की कोशिश की जाएगी। ऐसे में अधिवक्ताओं की बड़ी भूमिका होने वाली है। उन्हें देश और समाज के प्रति होने वाली साजिशों के विरुद्ध खुद को तैयार रखना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के 70 वर्ष तक हम उन्हें देख रहे थे जिन्होंने हमें गुलाम बनाया था। अब भारत खुद अपनी नीति बनाता है। इन नीतियों का नियंता भी खुद है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने गत 12 वर्षों में बदलते भारत की तस्वीर को देखा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा 12 वर्षों में देश की नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं का परिणाम है कि 25 करोड़ की आबादी गरीबी की रेखा से उबरकर सामान्य जीवनयापन कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा 2017 के पहले कोई यूपी के बारे में अच्छा नहीं बोलता था। यहां के लोगों को बाहर शक की निगाह से देखा जाता था। 2017 में डबल इंजन की सरकार बनने के उन्होंने यूपी में पूरी प्रतिबद्धता से कानून का राज लागू किया। परिणाम है कि यूपी के लोगों से दस कदम की दूरी बनाने वाले अब आगे बढ़कर गले लग जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी अब कट्टा और बम बनाने के लिए नहीं बल्कि ब्रह्मोस मिसाइल बनाने के लिए जाना जाता है। यह डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर से देश की रक्षा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देने वाला राज्य बन रहा है।

अधिवक्ता कल्याण निधि को बढ़ाकर किया पांच लाख रुपये

मुख्यमंत्री ने अधिवक्ता हित में अपनी सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि पहले डेढ़ लाख रुपये थी, उसे उन्होंने बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया। इसके लिए पांच सौ करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड बनाया गया है। इससे चार हजार अधिवक्ताओं को अबतक 200 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई है। उन्होंने बताया कि आर्थिक सहायता देने के लिए अधिवक्ताओं की उम्र सीमा को बढ़ाकर 70 वर्ष किया गया। न्याय मित्र सहित न्यायालयों में सरकार की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं की फीस बढ़ाने, नए न्यायालय भवन, अधिवक्ताओं के लिए चैंबर बनाने का कार्य भी सरकार ने किया। सरकार ने अधिवक्ता सामाजिक सुरक्षा निधि से 87 करोड़ 86 लाख रुपये का भुगतान करने के साथ, पुस्तकों और पत्रिकाओं के क्रय के लिए भी एक करोड़ 60 लाख रुपये की धनराशि जारी की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के पहले 10 ऐसे जिले थे जहां कोर्ट ही नहीं थे। वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए 3000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए और कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के मॉडल से अभिभूत देश के मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि यह मॉडल पूरे देश में लागू होना चाहिए। उन्होंने बताया कि 600 करोड़ रुपये की लागत से इलाहाबाद हाईकोर्ट में 10 हजार की क्षमता के और 2000 से अधिक अधिवक्ताओं के चैंबर वाले भवन का निर्माण पूर्ण हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सात वर्ष से अधिक सजा के लिए फोरेंसिक साक्ष्य की जरूरत होती है। पहले यूपी में फारेंसिक लैब की स्थिति बदहाल थी। फारेंसिक रिपोर्ट के लिए कई साल इंतजार करना पड़ता था। आज प्रदेश में 12 फारेंसिंक लैब बनाए गए हैं। स्टेट फारेंसिक इंस्टिट्यूट का भी गठन किया गया है। हर जिले में दाे फारेंसिक वैन उपलब्ध कराई गयी है। इसमें प्रशिक्षित मानव संसाधन भी उपलब्ध कराये गये हैं। उन्होंने कहा कि हमने नये कानूनों के अनुसार स्वयं को तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर सिविल कोर्ट की स्थापना का एक लंबा इतिहास है। 1895 में इस कोर्ट की स्थापना हुई थी। यह पीढ़ी दर पीढ़ी न्याय तथा समाज के मूल्यों को आगे बढ़ाता रहा है।

परिचय समारोह को जनपद न्यायाधीश राजकुमार सिंह और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उमापति उपाध्याय ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन बार एसोसिएशन के मंत्री मंत्री अनुज अस्थाना ने किया। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव के अलावा अधिवक्धागण मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय