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गुरु रविदास के समरस संकल्प को जन आंदोलन बनाएगी भाजपा, हिन्दुत्व और सामाजिक समरसता को देगी धार

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गुरु रविदास के समरस संकल्प को जन आंदोलन बनाएगी भाजपा, हिन्दुत्व और सामाजिक समरसता को देगी धार


- गुरु रविदास के जीवन-दर्शन से गढ़ेगा समरस भारत, दुनिया का सबसे प्राचीन जीवंत शहर काशी बनेगा साक्षी

- 'ऐसा चाहूं राज मैं...' के संकल्प के साथ भविष्य के भारत की नई सामाजिक पटकथा लिखने की तैयारी

- 650वीं जयंती पर काशी से होगा राष्ट्रव्यापी शंखनाद, कश्मीर से कन्याकुमारी तक पहुंचेगा समरसता का संदेश

लखनऊ, 24 जुलाई (हि.स.)। दुनिया का सबसे प्राचीन जीवंत शहर काशी एक बार फिर इतिहास का साक्षी बनने जा रहा है। जिस धरती ने वेदों, उपनिषदों, भगवान बुद्ध, आदि शंकराचार्य, संत कबीर और संत शिरोमणि गुरु रविदास जैसे महापुरुषों के विचारों से भारत की आत्मा को दिशा दी, वहीं से 29 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) को गुरु रविदास की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में भाजपा 'श्री गुरु रविदास समरस संकल्प अभियान' का शुभारंभ करेगी। 20 फरवरी 2027 तक चलने वाले 207 दिवसीय अभियान के माध्यम से पार्टी संत परंपरा, सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता, राष्ट्रबोध और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ भविष्य के भारत के सामाजिक विमर्श को नई दिशा देने की तैयारी में है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अभियान का शुभारम्भ करेंगे।

संत परंपरा से सामाजिक चेतना तक

भारत का इतिहास केवल साम्राज्यों और युद्धों का इतिहास नहीं, बल्कि संतों, ऋषियों और समाज सुधारकों की चेतना का इतिहास भी है। संत गुरु रविदास ने 'बेगमपुरा' की कल्पना और ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न, छोट बड़ो सब सम बसें... का संदेश देकर समरस और न्यायपूर्ण समाज का स्वप्न रखा। भाजपा इसी जीवन-दर्शन को वर्तमान और भविष्य के भारत से जोड़ते हुए इसे केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा, सामाजिक समरसता, राष्ट्रनिष्ठा और 'वसुधैव कुटुम्बकम' के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने वाले राष्ट्रीय अभियान के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

काशी से हाेगा राष्ट्रीय समरसता का शंखनाद

भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने बताया कि अभियान का शुभारंभ संत गुरु रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर (काशी) से होगा। यहां की पावन मिट्टी 11 हजार कलशों में भरकर देशभर के राज्यों में भेजी जाएगी। इसके बाद राज्य, जिला, मंडल और गांव स्तर तक कलश वंदन, संत समागम, गुरु वाणी पाठ, दीप प्रज्ज्वलन, प्रभात फेरी, समरसता सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। उद्देश्य काशी से निकले समरसता के संदेश को कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से पूर्वोत्तर तक पहुंचाना है।

सांस्कृतिक विरासत से भविष्य के भारत तक

अभियान के दौरान विश्वविद्यालयों, छात्रावासों और युवा सम्मेलनों में गुरु रविदास के जीवन-दर्शन, सामाजिक न्याय, समानता, सेवा और राष्ट्र निर्माण पर संवाद होंगे। भाजपा कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर संतों की शिक्षाओं, सनातन संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा का संदेश देंगे। राजनीतिक दृष्टि से भी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले चलने वाला यह अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी का प्रयास सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से देशभर में व्यापक वैचारिक संवाद स्थापित करना है। भाजपा का मानना है कि जिस काशी ने सदियों पहले भारत को संतों के विचार दिए थे, वही काशी अब अतीत की संत परंपरा से भविष्य के विकसित भारत तक विचारों की नई राष्ट्रीय यात्रा की साक्षी बनेगी।

पहला चरण : श्री गुरु रविदास कलश वंदन अभियान

अभियान का शुभारंभ गुरु पूर्णिमा पर काशी के सीर गोवर्धनपुर से होगा। यहां की पवित्र मिट्टी 11 हजार कलशों में भरकर देशभर के राज्यों में भेजी जाएगी। इसके बाद जिला, मंडल और गांव स्तर तक कलश यात्राएं निकलेंगी। दीप प्रज्ज्वलन, गुरु वाणी पाठ, भजन-कीर्तन, समरसता संकल्प, संत सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। स्थानीय मंदिरों की मिट्टी भी कलश में मिलाकर सांस्कृतिक एकात्मता का संदेश दिया जाएगा। उद्देश्य काशी से समरसता की ज्योति को पूरे देश में पहुंचाना है।

दूसरा चरण : संत संपर्क एवं समरसता अभियान

इस चरण में देशभर के संत-महात्माओं, आश्रमों, डेरों, मंदिर समितियों, अनुसूचित जाति समाज के प्रबुद्धजनों और सामाजिक संगठनों से संवाद होगा। संत सम्मान, सत्संग, गुरु वाणी पाठ, सामाजिक समरसता गोष्ठियां और जनसंवाद आयोजित किए जाएंगे। विभिन्न संत परंपराओं को एक मंच पर लाकर समता, सेवा, मानवता और सामाजिक न्याय का संदेश मजबूत किया जाएगा। भाजपा इसे संत समाज और आमजन के बीच स्थायी वैचारिक संवाद का माध्यम बनाना चाहती है।

तीसरा चरण : श्रीगुरु रविदास समरस यात्रा

पंजाब के डेरा सचखंड बल्लां से शुरू होकर काशी तक पहुंचने वाली समरस यात्रा कई राज्यों से होकर गुजरेगी। यात्रा में पवित्र कलश, गुरु रविदास की प्रतिमा और समरसता का संदेश साथ चलेगा। प्रत्येक पड़ाव पर प्रभात फेरी, नगर कीर्तन, संत सम्मेलन, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक समरसता पर संवाद होंगे। यात्रा का उद्देश्य संत गुरु रविदास के विचारों को राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता से जोड़ना है।

चौथा चरण : गुरु रविदास युवा छात्रावास संपर्क अभियान

अभियान के अंतिम चरण में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, छात्रावासों और कोचिंग संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। युवाओं को गुरु रविदास के जीवन-दर्शन, सामाजिक न्याय, समानता, राष्ट्रबोध और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जाएगा। व्याख्यान, युवा संवाद, साहित्य वितरण, प्रतिभा सम्मान और नेतृत्व विकास कार्यक्रम होंगे। उद्देश्य नई पीढ़ी को संत परंपरा से जोड़ते हुए समरस, जागरूक और राष्ट्रनिष्ठ समाज के निर्माण की दिशा में प्रेरित करना है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश