उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ की शहनाई की मधुर धुनें आज भी काशी की सांस्कृतिक आत्मा में गूंजती है : दयाशंकर मिश्र
वाराणसी, 21 अगस्त (हि.स.)। आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ.दयाशंकर मिश्र ने कहा कि संगीत साधना के अप्रतिम साधक, महान शहनाई वादक एवं ‘भारत रत्न’ उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ की पुण्यतिथि पर हम उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। अपनी कला और साधना से विश्वभर में भारतीय शास्त्रीय संगीत की अद्भुत पहचान स्थापित करने वाले बिस्मिल्लाह ख़ाँ की जीवन एवं कर्मभूमि काशी (वाराणसी) रही। उनकी शहनाई की मधुर धुनें आज भी काशी की सांस्कृतिक आत्मा में गूंजती हैं।
भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान की पुण्यतिथि के अवसर पर वाराणसी के लल्लापुरा में जनप्रतिनिधियों, संगीत प्रेमी लोगों और उनके समर्थकों ने फातमान की उनकी कब्र पर श्रद्धा के फूल अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दाैरान पूर्व महापौर रामगोपाल मोहले ने कहा कि 2006 में आज ही के दिन वाराणसी में बिस्मिल्लाह खान की शहनाई की आवाज बंद हो गई। वह हम लोगों के बीच नहीं रहे। उनका जीवन केवल शहनाई को समर्पित था। बक्सर के डुमरांव में जन्मे उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ने शहनाई को विश्व पटल पर पहचान दिलाकर भारत का नाम रोशन किया।
भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान की कब्र पर पहुंचें समर्थकों ने कहा कि बनारस की गलियों में उनकी शहनाई की गूंज आज भी गूंजती है। बिस्मिल्लाह खान ने जो शहनाई के लिए किया, वह दूसरा उस्ताद नहीं कर पाएगा। शहनाई को बजाते हुए उन्होंने विश्व स्तर पर नाम कमाया। यही कारण है कि उन्हें भारत रत्न का सम्मान मिला था।
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हिन्दुस्थान समाचार / शरद

