प्राकृतिक खेती से घटेगी लागत, बढ़ेगी किसानों की आमदनी
-15 गांवों के 40 किसानों ने सीखे फसल विविधीकरण और मूल्य संवर्धन के गुर
औरैया, 10 अगस्त (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में किसानों की खेती की लागत कम कर आय बढ़ाने के उद्देश्य से अपेक्षा महिला एवं बाल विकास समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय जैविक एवं प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम आयाेजित किया गया। प्रशिक्षण में 15 गांवों के 40 ग्रामीण एवं महिला किसानों ने प्रतिभाग किया। विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, मचान विधि और कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन की व्यवहारिक जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दूसरे दिन साेमवार काे कार्यक्रम का शुभारंभ समिति की परियोजना समन्वयक शिप्रा मिश्रा ने किसानों के स्वागत एवं अभिनंदन के साथ किया। समिति की सचिव रीना पाण्डेय ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेती में केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय फसल विविधीकरण को अपनाना चाहिए। अलग-अलग फसलों की खेती से जोखिम कम होगा और किसानों की आमदनी बढ़ाने के नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ कम लागत वाली टिकाऊ खेती को समय की जरूरत बताया।
प्रशिक्षक आलोक कुमार ने किसानों को मचान विधि, फसल विविधीकरण और कम लागत वाली खेती के तौर-तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन लेने, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने तथा कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण कर उनका मूल्य बढ़ाने के तरीके समझाए। जितेंद्र कुमार ने किसानों से स्थानीय स्तर पर खेती में आने वाली समस्याओं पर संवाद किया और उनके समाधान सुझाए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में मिली जानकारी को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि छोटे स्तर पर खेतों में प्रयोग कर उसके परिणाम देखें। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने अपने अनुभव और समस्याएं भी साझा कीं। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के माध्यम से कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी के लिए व्यवहारिक रूप से सक्षम बनाना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार

