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धौरा नाग मंदिर : आज तक नहीं टिक सकी छत, नागपंचमी पर उमड़ते हैं श्रद्धालु

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धौरा नाग मंदिर : आज तक नहीं टिक सकी छत, नागपंचमी पर उमड़ते हैं श्रद्धालु


औरैया, 17 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के धौरा गांव में स्थित प्राचीन नाग मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के कारण लोगों के बीच आज भी आस्था और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। नागपंचमी के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की सबसे खास बात यह है कि आज तक यहां स्थायी छत नहीं बन सकी है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि कई बार छत डालने का प्रयास किया गया, लेकिन निर्माण टिक नहीं सका।

ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर में प्राचीन और खंडित मूर्तियां भी मौजूद हैं। मंदिर को मुगल आक्रमण के दौरान हुई तोड़फोड़ से भी जोड़कर देखा जाता है। हालांकि इन ऐतिहासिक दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मंदिर पर छत बनवाने का प्रयास करने वालों के परिवार में अनहोनी हुई।

ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के एक इंजीनियर ने मंदिर पर छत डलवाने का प्रयास किया था। कुछ समय बाद उसके दोनों बच्चों की असमय मृत्यु हो गई और मंदिर की छत भी गिर गई। इसके बाद से किसी ने यहां छत बनवाने का प्रयास नहीं किया। हालांकि इन घटनाओं और छत गिरने के बीच संबंध की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

मंदिर से जुड़ी एक अन्य मान्यता के अनुसार, यहां से कोई व्यक्ति ईंट, मूर्ति अथवा अन्य वस्तु ले जाता है तो उसे बाद में वापस मंदिर में रखना पड़ता है।

वरिष्ठ पत्रकार एवं इतिहासकार हरेन्द्र राठौर ने बताया कि मंदिर इतिहास से जुड़ी एक प्रमुख घटना ये है कि वर्ष 1957 में इटावा के तत्कालीन जिलाधिकारी भी यहां से एक मूर्ति ले गए थे, जिसे बाद में वापस मंदिर में लाकर रखा गया। यह जानकारी गांव के बुजुर्ग बताया करते थे।

उन्होंने बताया कि नागपंचमी पर धौरा गांव में मेले का आयोजन होता है। मंदिर में विशेष पूजा के साथ दंगल भी कराया जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। मान्यताओं की सच्चाई चाहे जो हो, प्राचीन मंदिर आज भी क्षेत्र में आस्था और रहस्य का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार