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पितृपक्ष : मातृनवमी पर 10 हजार अजन्मी बेटियों का किया गया श्राद्ध एवं तर्पण

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पितृपक्ष : मातृनवमी पर 10 हजार अजन्मी बेटियों का किया गया श्राद्ध एवं तर्पण


वाराणसी,04 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में पितृपक्ष की मातृनवमी पर रविवार को सामाजिक संस्था आगमन ने कन्या भ्रूण हत्या के महापाप के खिलाफ बड़ा संदेश दिया। दशाश्वमेध घाट पर जन्म लेने के पहले ही मां की कोख में पुत्र मोह मे मारी गई 10 हजार अजन्मी बेटियों का विधिवत मंत्रोंच्चार के बीच श्राद्ध कर्म किया गया। इस श्राद्ध कर्म में अजन्मी बेटियों की आत्मा की शांति और सद्गति के लिए घाट पर मां गंगा के किनारे की मिट्टी से पिंड वेदी का निर्माण कर भूमि संस्कार किया गया।

श्राद्धकर्ता व संस्था के संस्थापक सचिव डा. संतोष ओझा ने पांच वैदिक आचार्यों के सानिध्य में वेद मंत्रोच्चार के बीच संकल्प लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके आचार्यों के मार्गदर्शन में शीतल जल से तर्पण का विधान पूरा किया। इसके बाद कोख में मारी गईं उन निर्दोष बेटियों की अतृप्त आत्माओं का आवाह्न किया। इसके बाद जौ के आटे, शहद, देसी घी, काले तिल और गंगाजल के बनाए गए 10,000 पिंडों को अजन्मी बेटियों के प्रतीक रूप में स्थापित कर वैदिक रीति से पूजन किया गया। आचार्यों के मार्गदर्शन में शीतल जल से तर्पण का विधान पूरा हुआ। संस्था के कार्यकर्ताओं ने समाज की इस कुरीति के लिए ईश्वर से क्षमा-याचना करते हुए पिंडों को गंगा की धारा में विसर्जित किया।

12 सालों में 1.5 लाख से अधिक अजन्मी बेटियों का पिंडदान

आगमन संस्था के संस्थापक वरिष्ठ पत्रकार डॉ संतोष ओझा ने बताया कि कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ वर्ष 2001 से संस्था जन-जागरण अभियान चला रही है। पिछले 12 वर्षों में 1.5 लाख से अधिक अजन्मी बेटियों का तर्पण, पिंडदान और पंचबलि किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि श्राद्ध सिर्फ धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि पुत्र मोह में अंधे हो चुके माता-पिता और सोए हुए समाज की चेतना को जगाने का भी प्रयास है। पूजन कराने वाले आर्चायों में पं. दिनेश दुबे, पं. धनंजय तिवारी व पं. सीताराम आदि शामिल रहे।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी