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तकनीक वही सार्थक है, जो संस्कृति से जुड़ी रहे : आनंदीबेन पटेल

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तकनीक वही सार्थक है, जो संस्कृति से जुड़ी रहे : आनंदीबेन पटेल


तकनीक वही सार्थक है, जो संस्कृति से जुड़ी रहे : आनंदीबेन पटेल


तकनीक वही सार्थक है, जो संस्कृति से जुड़ी रहे : आनंदीबेन पटेल


—महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षान्त समारोह सम्पन्न

भारत की प्राचीन संस्कृति, शिक्षा का केन्द्र है काशी : कैप्टन बी.के. त्यागी

वाराणसी, 28 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में वाराणसी जनपद स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को रूद्राक्ष कन्वेंशन सेन्टर, सिगरा में सम्पन्न हुआ। समारोह की मुख्य थीम 'विगत एक दशक मे भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत 2047 की आधारशिला' रही। दीक्षांत समारोह में 26 मेधावी विद्यार्थियों (20 छात्राएं एवं 6 छात्र) तथा दो उत्कृष्ट खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. के कुल 63,183 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 41,000 छात्राएं तथा 22,183 छात्र शामिल रहे।

दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने भारतीय ज्ञान परंपरा, पांडुलिपियों के संरक्षण और ज्ञान भारतम् मिशन से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के आदर्शों को जीवन में उतारने का संदेश देकर कहा कि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ महात्मा गांधी के विचारों का प्रतीक है। महात्मा गांधी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार थे। उन्होंने सत्य और अहिंसा के माध्यम से विश्व को यह संदेश दिया कि बिना हथियार उठाए भी साम्राज्यवादी सत्ता को चुनौती दी जा सकती है और इतिहास की दिशा बदली जा सकती है।

राज्यपाल ने जल संरक्षण का संदेश देते हुए विद्यार्थियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैच द रेन अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के संरक्षण तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण पर बल देते हुए कहा कि आज बचाई गई वर्षा की प्रत्येक बूंद भविष्य की पीढ़ियों के लिए अमूल्य संपदा है। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्जागरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा कोलकाता में म्यूजियम ऑफ वर्ड के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत की भाषा, साहित्य और ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने की ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि भारत केवल प्राचीन सभ्यता नही बल्कि मानवता के कल्याण का रहा हैं। भारत में ऋषि मुनियों द्वारा अमूल्य पांडुलिपि के रूप में ज्ञान, विज्ञान अनुसंधान के धरोहर हैं, जिसे डिजिटल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवा तकनीक का सृजनकर्ता बने न कि मात्र उपयोगकर्ता। तकनीक वही सार्थक है, जो संस्कृति से जुड़ा रहे। रचनात्मकता हमेशा मातृ-भाषा में विकसित होती है। इसलिए नई शिक्षा नीति में इसे लागू किया गया है। भारत में विदेशी छात्र भी आ रहे हैं, जो यहां की संस्कृति, योग, ज्ञान विज्ञान के लिए आते है जो भारत की वैश्विक प्रमाणिकता को बताती है।

राज्यपाल ने कहा कि भारत की युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ऊर्जा है। युवाओं को सामाजिक सरोकारों और राष्ट्रहित के कार्यों से जोड़ने के लिए 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं का माय भारत ऐप पर पंजीकरण कराया जा रहा है, जिससे अब तक दो करोड़ से अधिक युवा जुड़ चुके हैं। देशभर में माय भारत के चिंतन शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।

समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कैप्टन बी.के. त्यागी, सी.एम.डी. शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मुंबई ने कहा कि काशी भारत की प्राचीन संस्कृति, शिक्षा का केन्द्र रहा है। महात्म गांधी काशी विद्यापीठ इस परम्परा का प्रतीक है। विकसित भारत 2047 के मिशन को प्राप्त करने के लिए भारत सरकार द्वारा मरीन क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं लाई गयी हैं। पूरी पृथ्वी दो तिहाई जल से घिरी है। भारत भी नदियों से लेकर समुद्र तक में विकास के नए प्रयास कर रहा है। इस क्षेत्र मे भी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि मैं आप सभी उपाधि प्राप्त युवाओं को मर्चेंट नेवी और अन्य जलमार्ग पर बन रही संभावाओ व रोजगार के लिए आने का आह्वान करता हूं।

समारोह में विशिष्ट अतिथि योगेंद्र उपाध्याय (कैबिनेट मंत्री, उच्च शिक्षा उत्तर प्रदेश) ने कहा कि शिक्षा संस्कार देती है। शिक्षा का उद्देश्य संस्कारयुक्त नागरिक देना है। जब देश हमें कुछ दे रहा तो हमारा यह कर्तव्य है कि हम भी देश के विकास मे सहायक हों। जो भी पद मिले, जो भी बने, राष्ट्र के सेवा के लिए कार्य करें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन है 'भारत को विकासशील से निकाल विकसित राष्ट्र के श्रेणी में खड़ा करना है।

विशिष्ट अतिथि रजनी तिवारी ( राज्य मंत्री उच्च शिक्षा, उत्तर प्रदेश) ने कहा कि उपाधि प्राप्त कर आप सभी नये अध्याय की और बढ़ रहे। समाज, परिवार और देश के लिए उत्तरदायित्व का बोध आपको हो। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के राष्ट्र निर्माण की परम्परा को आपको आगे बढ़ाना है। 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को पाने में सबसे बड़ा योगदान आप युवाओ का होगा। कामयाबी के बाद स्वकेंद्रित न होकर समाज के लिए काम करना होगा।

इसे पहले समारोह की शुरुआत में काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को कुलाधिपति के समक्ष रखा। विश्वविद्यालय के उपलब्धियों को रेखांकित किया। नई शिक्षा के तहत कौशल विकास पर आधारित रोजगारोन्मुख व क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम व नए प्रयोगों को बताया। साथ ही खेल व अनुसंधान के नवाचार के किए गए प्रयासों व उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

——श्रीधर राव को डी.लिट. की मानद उपाधि दी गई

दीक्षान्त समारोह में भारतीय हथकरघा और शिल्प में नवाचार व प्राकृतिक रंगों के प्रयोग साथ ही महिला सशक्तिकरण के द्वारा भारतीय शिल्प को वैश्विक पहचान तक ले जाने के लिए श्री देवी हैंडलूम, तेलंगाना के संस्थापक वाई. श्रीधर राव को डी.लिट. की मानद उपाधि दी गई। इस मौके पर विश्वविद्यालय एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों के चार शिक्षकगण को उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से सम्मानित भी किया गया। इससे पहले राज्यपाल, उत्तर प्रदेश एवं कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल के निर्देशन में में 75 बालिकाओं को किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत एच.पी.वी. टीकाकरण किया गया। दीक्षान्त से पूर्व दीक्षोत्सव 2026 कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी