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याेगी सरकार में अग्रगामी महानगर के रूप में पहचान बना रहा गोरखपुर

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याेगी सरकार में अग्रगामी महानगर के रूप में पहचान बना रहा गोरखपुर


याेगी सरकार में अग्रगामी महानगर के रूप में पहचान बना रहा गोरखपुर


गोरखपुर, 27 मई (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच और मार्गदर्शन में गोरखपुर अब ‘अनुगामी’ नहीं बल्कि ‘अग्रगामी’ महानगर के रूप में देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है। विकास, नवाचार, स्वच्छता और आधुनिक शहरी सुविधाओं के क्षेत्र में गोरखपुर अब केवल दूसरे शहरों का अनुसरण नहीं करता, बल्कि स्वयं मिसाल बनकर उभर रहा है। महापौर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में बीते तीन वर्षों के दौरान नगर निगम ने विकास की ऐसी गाथा लिखी है, जिसने गोरखपुर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है।

महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव के कार्यकाल में नगर निगम ने सड़क, पेयजल, जल निकासी, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और नगरीय सौंदर्यीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। करीब ढाई हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को धरातल पर उतारते हुए गोरखपुर को आधुनिक शहरी विकास के मानचित्र पर चमकाया गया है। यही नहीं, जीवन सुगमता, प्रदूषण नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और छोटे कारोबारियों के सशक्तिकरण के क्षेत्र में नगर निगम के अभिनव प्रयासों को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

जल शोधन और शहरी बाढ़ प्रबंधन में बना राष्ट्रीय मॉडल

गोरखपुर नगर निगम ने पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन के क्षेत्र में ऐसी पहल की है, जिसकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। तकियाघाट पर प्राकृतिक विधि ‘फाइटोरेमेडिएशन तकनीक’ के माध्यम से जल शोधन का अभिनव मॉडल तैयार किया गया है। पहले महानगर का प्रदूषित जल 15 मुख्य नालों के जरिए सीधे राप्ती और रोहिन नदी में गिरता था। अब 7 नालों का जल सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से शुद्ध किया जा रहा है, जबकि शेष 8 नालों के लगभग 15 एमएलडी जल का शोधन प्राकृतिक तकनीक से कराया जा रहा है।

नगर निगम की इस पहल की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सराहना की है तथा इसे देश के अन्य शहरों के लिए अनुकरणीय मॉडल माना जा रहा है। इसी तरह अर्बन फ्लड मैनेजमेंट के तहत विकसित अर्ली वार्निंग सिस्टम और ऑटोमेटिक फ्लड पंपिंग स्टेशन की भी नीति आयोग तक ने प्रशंसा की है। वर्ष 2025 में इस मॉडल को ग्लोबल वाटर टेक अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।

वेस्ट टू वेल्थ और ईको पार्क बना आकर्षण का केंद्र

वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती कचरा प्रबंधन को मानते हुए नगर निगम ने ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और ‘वेस्ट टू आर्ट’ की अवधारणा को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारा है। सुथनी में 40 एकड़ भूमि पर इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी का निर्माण अंतिम चरण में है, जो आने वाले समय में ऊर्जा उत्पादन का भी बड़ा केंद्र बनेगा।

इसके साथ ही एकला बांध पर वर्षों से जमा कूड़े के पहाड़ का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर वहां विकसित किया गया ‘राप्ती ईको पार्क’ आज पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह स्थान अब प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बन गया है।

आधारभूत सुविधाओं को मिली नई मजबूती

बीते तीन वर्षों में नगर निगम ने सड़क, नाली, पेयजल और जल निकासी की परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर कार्य किया। त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत 230 करोड़ रुपये की लागत से 183 सड़क एवं नाली निर्माण कार्य कराए गए। मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना के अंतर्गत नवसृजित वार्डों में सड़क, नाला और पार्क निर्माण पर 27.24 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

सीवरेज एवं जल निकासी योजना के तहत 129.85 करोड़ रुपये से 83 नालों का निर्माण कराया गया, जबकि 15वें वित्त आयोग के तहत 108.84 करोड़ रुपये की लागत से 500 से अधिक विकास कार्य पूरे किए गए। अमृत 2.0 योजना के तहत पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 81.79 करोड़ रुपये की परियोजनाएं संचालित की गईं।

स्मार्ट रोड, फूड स्ट्रीट और डिजिटल सुविधाओं से बदली शहर की तस्वीर

सीएम ग्रिड योजना के अंतर्गत राप्तीनगर में 45 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट रोड का निर्माण कराया गया, जबकि गोलघर क्षेत्र में 55 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट रोड परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। छह नई स्मार्ट सड़कों के लिए 243 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय