ग्रीष्मकालीन संस्कार गीत कार्यशाला का समापन, कलाकारों ने दी जोरदार प्रस्तुति
वाराणसी, 11 जून (हि. स.)। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी एवं लोकायन कला प्रशिक्षण ट्रस्ट, वाराणसी के संयुक्त तत्वाधान में संचालित नाद प्रवाह के पंद्रह दिवसीय ग्रीष्मकालीन संस्कार गीत कार्यशाला का समापन हुआ। भोजूबीर स्थित शेषनाथ सिंह सभागार में गुरुवार काे समापन समारोह में मुख्य अतिथि हिन्दी एवं भोजपुरी के वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर प्रकाश उदय रहे।
कार्यशाला में 12 वर्ष की आयु से लेकर प्रौढ़ आयु वर्ग तक के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समापन समारोह में प्रतिभागियों ने संस्कार गीतों की मनोहारी प्रस्तुतियाँ दीं। जिन्हें उपस्थित दर्शकों एवं अतिथियों से भरपूर सराहना प्राप्त हुई।
लोकायन कला प्रशिक्षण ट्रस्ट की मुख्य न्यासी एवं कार्यशाला की प्रशिक्षिका सरोज वर्मा ने समारोह में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों एवं दर्शकों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कार्यशाला के प्रशिक्षण एवं उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर संस्कार गीतों के धीरे-धीरे विलुप्त होते स्वरूप पर चिंता व्यक्त की तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला के प्रतिभागी कलाकारों में अभिलाषा पाण्डेय, निशु पाण्डेय, वंदना श्रीवास्तव, रागिनी श्रीवास्तव, पुष्पा श्रीवास्तव, अपर्णा पाण्डेय, हर्ष जयसवाल, सूरज प्रसाद विश्वकर्मा, वंदना श्रीवास्तव, वंदना शुक्ला, रिंकी यादव, रचना श्रीवास्तव, एकता, अभिषेक शर्मा, प्रियंका मिश्रा और सीमा श्रीवास्तव ने जोरदार प्रस्तुति की। इसी दौरान नगेन्द्र शर्मा ने हारमोनियम और शशिकांत द्विवेदी ने तबला पर संगत किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / शरद

