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उपचार के दौरान मादा तेंदुआ 'जेरी' ने तोड़ा दम, इलाज के लिए लाई जा रही वृद्ध शेरनी की रास्ते में मौत

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उपचार के दौरान मादा तेंदुआ 'जेरी' ने तोड़ा दम, इलाज के लिए लाई जा रही वृद्ध शेरनी की रास्ते में मौत


उपचार के दौरान मादा तेंदुआ 'जेरी' ने तोड़ा दम, इलाज के लिए लाई जा रही वृद्ध शेरनी की रास्ते में मौत


कानपुर, 01 अगस्त (हि.स.)। प्राणी उद्यान में रह रही मादा तेंदुआ 'जेरी' का कई महीनों से विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की निगरानी में उपचार चल रहा था। वहीं, बिजनौर के अमानगढ़ से गंभीर रूप से बीमार वृद्ध शेरनी को उपचार के लिए कानपुर लाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। दोनों वन्यजीवों का तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल से पोस्टमार्टम कराया गया है और ऊतक के नमूने जांच के लिए आईवीआरआई, इज्जतनगर (बरेली) भेजे जाएंगे।कानपुर प्राणी उद्यान के निदेशक डॉ. कन्हैया पटेल ने कहा कि शनिवार का दिन बेहद दुखद रहा। एक ही दिन में प्राणी उद्यान ने दो वन्यजीवों को खो दिया। लंबे समय से बीमार चल रही मादा तेंदुआ 'जेरी' ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि बिजनौर के अमानगढ़ से इलाज के लिए लाई जा रही एक वृद्ध शेरनी की कानपुर पहुंचने से पहले ही रास्ते में मौत हो गई। दोनों वन्यजीवों का पोस्टमार्टम कराकर उनके ऊतक के नमूने वैज्ञानिक जांच के लिए सुरक्षित कर लिए गए हैं।उन्होंने बताया कि मादा तेंदुआ 'जेरी' को वर्ष 2019 में बिजनौर से रेस्क्यू कर कानपुर प्राणी उद्यान लाया गया था। अप्रैल 2026 में उसने अपनी ही पूंछ काटकर खुद को गंभीर रूप से घायल कर लिया था। इसके बाद उसके घाव में संक्रमण फैल गया और वह सेप्टीसीमिया (रक्त संक्रमण) से पीड़ित हो गई। सेप्टीसीमिया ऐसी गंभीर चिकित्सीय स्थिति होती है, जिसमें संक्रमण रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में फैल जाता है और समय पर नियंत्रण न होने पर कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। पिछले कई महीनों से विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसका लगातार उपचार चल रहा था, लेकिन सभी प्रयासों के बावजूद आज उसकी मौत हो गई।इसी क्रम में बिजनौर के अमानगढ़ क्षेत्र से एक वृद्ध मादा शेरनी को विशेष उपचार के लिए कानपुर प्राणी उद्यान लाया जा रहा था। प्राणी उद्यान के अधिकारियों के अनुसार शेरनी लंबे समय से उम्रजनित गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी और उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। बेहतर उपचार के उद्देश्य से उसे कानपुर लाया जा रहा था, लेकिन कानपुर से करीब 40 किलोमीटर पहले रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।दोनों वन्यजीवों की मृत्यु के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत तीन सदस्यीय पशु चिकित्सकों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के दौरान दोनों के ऊतक (टिश्यू) सुरक्षित किए गए हैं, जिन्हें विस्तृत परीक्षण के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर, बरेली भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही दोनों की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।डॉ. कन्हैया पटेल ने बताया कि प्राणी उद्यान में बीमार और घायल वन्यजीवों के उपचार के लिए सभी आवश्यक चिकित्सीय व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों मामलों में नियमानुसार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और वैज्ञानिक जांच के लिए नमूने भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप