अहंकार त्याग और सत्संग से ही मिलती है सच्ची शांति : विजय कौशल महाराज
कानपुर, 24 मार्च (हि.स.)। मनुष्य को सच्ची शांति और आनंद तभी प्राप्त होता है, जब वह अहंकार, क्रोध और लोभ का त्याग कर सत्संग और भक्ति के मार्ग को अपनाता है, क्योंकि जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मिक उन्नति है। यह बातें मंगलवार को श्री हनुमान कथा के तृतीय दिवस पर कानपुर विश्वविद्यालय सभागार में कथा वाचन के दौरान पूज्य विजय कौशल महाराज ने कहीं।
तृतीय दिवस पर कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा और पूरा सभागार भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
महाराज जी के मुखारविंद से प्रवाहित अमृतमयी वाणी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया और सभी को भक्ति, सत्संग एवं सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपने जीवन में सत्य, सेवा और संस्कारों को अपनाने का संकल्प भी लिया।
कथा के दौरान महाराज जी ने कहा कि मनुष्य का जीवन केवल भौतिक सुख-सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति के लिए प्राप्त हुआ है। जब तक व्यक्ति अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह को समाप्त नहीं करता, तब तक उसे सच्ची शांति और आनंद की प्राप्ति नहीं हो सकती।
उन्होंने संत और असंत के स्वरूप को विस्तार से समझाते हुए बताया कि संत वह होता है जो अपमान में भी शांत रहता है, दूसरों के दुख को अपना दुख मानता है और सेवा, प्रेम एवं करुणा का मार्ग अपनाता है। इसके विपरीत असंत व्यक्ति स्वार्थ में लिप्त रहकर दूसरों को कष्ट पहुंचाता है और अंततः स्वयं दुखों में घिर जाता है।
महाराज जी ने कहा कि “संतों के संग रहने से मनुष्य का जीवन बदल जाता है, क्योंकि सत्संग वह दीपक है जो अज्ञान के अंधकार को समाप्त कर देता है।” उन्होंने आचरण सुधार पर जोर देते हुए कहा कि केवल ज्ञान की बातें करने से नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारने से ही वास्तविक परिवर्तन संभव है।
कथा के दौरान श्रीराम और भक्त हनुमान जी के आदर्श चरित्रों के माध्यम से जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि भक्ति में अपार शक्ति है और समर्पण में ही परम सुख निहित है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में सत्य, सेवा और संस्कारों को अपनाकर परिवार और समाज में प्रेम व सद्भाव बनाए रखें।
उन्होंने यह भी कहा कि हर परिस्थिति में भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए, क्योंकि ईश्वर की कृपा से ही जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। सत्संग, साधना और सेवा को जीवन का आधार बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का रसपान करते रहे।
इस अवसर पर मुख्य यजमान डॉ. मुकेश पालीवाल (उपाध्यक्ष, इस्कॉन मंदिर) एवं रज्जननलाल जायसवाल उपस्थित रहे। साथ ही प्रमुख अतिथियों में श्री राम जी (प्रांत प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ), नीतू सिंह (सीए, प्रबंधक वीएसएसडी कॉलेज) एवं विधायक सुरेन्द्र मैथानी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अंत में कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. एस.के. पालीवाल, उपाध्यक्ष अनूप पचौरी, मंत्री उमेश निगम, संयोजक डॉ. विवेक द्विवेदी सहित अन्य सदस्यों ने श्रद्धालुओं से आगामी दिनों में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा का लाभ लेने का आग्रह किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

