home page

श्रीमद्भागवत कथा का उद्देश्य जीव को मृत्यु के भय से पार ले जाना : आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज

 | 
श्रीमद्भागवत कथा का उद्देश्य जीव को मृत्यु के भय से पार ले जाना : आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज


अयोध्या राम नगरी से पधारे कथा व्यास ने राजा परीक्षित और शुकदेव परमहंस के संवाद सुनाया

मुरादाबाद, 08 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद में सीएल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट के सभागार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठें दिन सोमवार को अयोध्या राम नगरी से पधारे कथा व्यास आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का उद्देश्य जीव को मृत्यु के भय और बोध से पार ले जाना है। उन्होंने राजा परीक्षित और शुकदेव परमहंस के संवाद का उल्लेख किया।

आचार्य मिथिलेशनंदिनी ने आगे बताया कि श्रीमद्भागवत पुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान का स्रोत है। कलियुग में भगवान की भक्ति, सत्संग और भागवत कथा का श्रवण ही मनुष्य के कल्याण का सर्वोत्तम मार्ग है। ऋषियों द्वारा सूत से किए गए प्रश्नों, राजा परीक्षित को प्राप्त शाप और मोक्ष प्राप्ति के लिए उनके प्रयासों का विस्तार से वर्णन किया गया।

आचार्य आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज ने कहा कि मृत्यु जीवन का अटल सत्य है और मनुष्य को अपने जीवन का प्रत्येक क्षण धर्म, भक्ति एवं मानव सेवा में लगाना चाहिए। राजा परीक्षित ने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर भगवान की शरण ग्रहण की और शुकदेव से परम कल्याण का मार्ग पूछा। इसी दिव्य संवाद के रूप में श्रीमद्भागवत महापुराण का ज्ञान संसार को प्राप्त हुआ। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहें।

-------------

हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल