नशामुक्ति और स्वास्थ्य जागरूकता के साथ रासेयो ने दिया जनसेवा का संदेश
गोरखपुर, 04 फ़रवरी (हि.स.)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के विशेष शिविर का चतुर्थ दिवस बुधवार काे को भारद्वाज इकाई, अष्टावक्र इकाई एवं आत्रेय इकाई के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम अधिकारियों आचार्य साध्वी नन्दन, डॉ वैसाख, डॉ श्रीनाथ के मार्गदर्शन में अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । जिसमें योग, स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक जागरूकता, बौद्धिक विमर्श एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से “सेवा से संस्कार” की भावना को सशक्त किया गया।
शिविर के चतुर्थ दिवस का शुभारंभ पंचकर्म हॉल में योग एवं ध्यान अभ्यास के साथ हुआ। स्वयंसेवकों ने शारीरिक एवं मानसिक आरोग्यता हेतु विभिन्न योगासनों, प्राणायाम एवं सामूहिक ध्यान का अभ्यास किया। इस सत्र का उद्देश्य स्वयंसेवकों में एकाग्रता, आत्मसंयम एवं आंतरिक शांति का विकास करना रहा।
इसके उपरांत तीनों इकाइयों द्वारा अपने-अपने निर्धारित ग्रामों में क्षेत्रीय सेवा एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए गए।
भारद्वाज इकाई द्वारा ग्राम बैजनाथपुर में निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। रोगियों को निःशुल्क औषधियाँ वितरित की गईं तथा डॉ अभिजीत द्वारा पथ्य-अपथ्य एवं स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में परामर्श दिया गया।
अष्टावक्र इकाई ने ग्राम मनीराम में महिला स्वास्थ्य एवं सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर डॉ जितेन्द्र और स्वयंसेवकों द्वारा ग्रामीण महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।
आत्रेय इकाई द्वारा ग्राम बालापार में व्यसन मुक्ति अभियान चलाया गया, जिसके अंतर्गत ग्रामीणों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने हेतु प्रेरित किया गया।
दिवस के बौद्धिक सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. अपर्णा पाठक द्वारा “डिजिटल व्यवहार, सोशल मीडिया एवं चिकित्सा छात्रों का व्यक्तित्व विकास” विषय पर एक प्रेरणादायक व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उन्होंने डिजिटल शिष्टाचार, सोशल मीडिया के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सीमाओं तथा एक चिकित्सक के लिए मानवीय संवेदना, संवाद कौशल और नैतिक मूल्यों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है; एक सफल चिकित्सक बनने के लिए उत्तम संवाद शैली, धैर्य और सहानुभूति जैसे गुणों का विकास अनिवार्य है।
व्याख्यान ने छात्रों को आत्ममंथन एवं व्यक्तित्व परिष्कार की दिशा में प्रेरित किया।
दिन के अंतिम चरण में सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें स्वयंसेवकों ने काव्य पाठ, वैचारिक अभिव्यक्ति, लोक गीत एवं नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं। इन कार्यक्रमों ने वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया तथा छात्रों में टीम भावना, सृजनात्मकता एवं सांस्कृतिक चेतना का संचार किया।
समग्र रूप से राष्ट्रीय सेवा योजना विशेष शिविर का चतुर्थ दिवस योग, समाज सेवा, स्वास्थ्य जागरूकता, बौद्धिक विमर्श एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के समन्वय के साथ अत्यंत प्रेरणादायक एवं सफल रहा। इस दिन स्वयंसेवकों को सामाजिक उत्तरदायित्व, मानवीय संवेदना और जीवनोपयोगी अनुभवों से सीखने का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ।
आज के दिन कार्यक्रम अधिकारियों सहित डॉ अभिजीत, डॉ अर्पित, डॉ जितेन्द्र, डॉ शांति भूषण आदि चिकित्सकों सहित सभी स्वयंसेवकों की सराहनीय भूमिका रही।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

