home page

अमंगल चाहने वालों का कभी नहीं होता मंगल : पं. रजनीकांत द्विवेदी

 | 
अमंगल चाहने वालों का कभी नहीं होता मंगल : पं. रजनीकांत द्विवेदी


अमंगल चाहने वालों का कभी नहीं होता मंगल : पं. रजनीकांत द्विवेदी


जौनपुर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में नगर के एक लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने राजा उत्तानपाद की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि दूसरों का अमंगल चाहने वालों का कभी मंगल नहीं होता। प्रत्येक व्यक्ति को सबके कल्याण की भावना रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण और श्लोकों के पाठ से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। व्यक्ति को प्रतिदिन कुछ समय निकालकर भगवान का स्मरण और भागवत के श्लोकों का पाठ करना चाहिए। साधु-संतों की संगति जीवन को नई दिशा देती है।

मां को बच्चों की पहली गुरु बताते हुए पं. द्विवेदी ने कहा कि माता से मिलने वाले संस्कार ही बच्चों के व्यक्तित्व और भविष्य की नींव रखते हैं। अच्छे संस्कार बच्चों को सफलता की राह पर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि गृहिणी से ही घर की वास्तविक पहचान होती है। केवल ईंट-पत्थर से बने मकान को घर नहीं कहा जा सकता।

कथाव्यास ने कहा कि परमात्मा की कृपा से जीवन में सब कुछ संभव है। मुख्य यजमान विमला सेठ के परिवार की ओर से आयोजित कथा में श्रद्धालुओं ने भागवत का श्रवण किया।

इस अवसर पर अजय कुमार सिंह, चंद्रप्रकाश सोनी, डॉ. ब्रह्मेश शुक्ला, गंगाधर शुक्ला, अर्चना सेठ, अजीत सेठ, विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ और हार्दिक सेठ सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव