बैलगाड़ी का सफर अब नई पीढ़ी के लोगों के लिए बनी कहानी
आधुनिक युग में बीहड़ के गांवों में ई-रिक्शा का चलन बढ़ा
हमीरपुर, 11 नवम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में कुरारा,विकास खंड क्षेत्र में प्राचीन वाहन गाड़ी बैल का चलन लगभग समापन की तरफ जा रही है। आधुनिक वाहनों की चकाचौंध में बैल गाड़ी की सवारी यदा कदा दिखाई देती है। बीहड़ वाले गांवों में भी ई रिक्शा ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। ग्रामीण अब इस वाहन से लोग दूरी तक का सफर तय करते हैं।
गांवों से लेकर कस्बे तक लोग सबसे अधिक रिक्शा की सवारी करते नजर आते हैं। आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए बैल गाड़ी का सफर एक कहानी बन कर रह जाएगा। चार दशक पूर्व लोग इन बैल गाड़ी से दूरी तक का सफर कर लेते थे। तथा कृषि कार्य भी इन बैलों के द्वारा किया जाता था। अब ट्रैक्टर व कृषि के आधुनिक उपकरणों के चलन में आ जाने से इन बैलों का महत्व घट गया है। आज कस्बे में एक महिला अपने परिजनों को बैल गाड़ी से लेकर कस्बे में बाजार करने आई थी। ऐसे दृश्य यदाकदा दिखाई दे जाते हैं। इन धरोहर को आज भी ग्रामीण क्षेत्र में लोग संजोए हुए हैं। आगे आने वाली पीढ़ियां इन बैल गाड़ी वाले युग की सिर्फ बुजुर्गों से ही जानकारी ले पाएंगे। अब मशीनरी युग में इनका महत्व नहीं रह गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा

