ड्रोन का ब्रेन होता है फ्लाइट कंट्रोलर : किरण वालिया
जौनपुर, 13 अक्टूबर (हि.स.)। यूपी के जौनपुर स्थित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय और सी-डैक, नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय ‘स्वयान’ बूटकैंप के दूसरे दिन मंगलवार को विद्यार्थियों को ड्रोन तकनीक, सेंसर और उसके विभिन्न घटकों की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्रों के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर विद्यार्थियों को ड्रोन के कंपोनेंट्स असेंबल करने के गुर सिखाए।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित बूटकैंप का विषय ‘मानवरहित विमान प्रणाली, सेंसर और उनके उपयोग’ है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उभरती तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने के साथ उनमें तकनीकी कौशल, नवाचार और अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करना है।
तकनीकी सत्र में सी-डैक, नोएडा की प्रोजेक्ट इंजीनियर किरण वालिया ने ड्रोन के प्रमुख घटकों और विभिन्न इंटीग्रेटेड सर्किट (आईसी) की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फ्लाइट कंट्रोलर ड्रोन का ब्रेन होता है। किसी भी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उपयोग करने से पहले उसकी डेटा शीट और तकनीकी विशेषताओं को समझना जरूरी है। उन्होंने ‘मिशन प्लानर’ सॉफ्टवेयर के माध्यम से ड्रोन कैलिब्रेशन की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया।
इसके बाद सी-डैक की प्रोजेक्ट इंजीनियर ईशा गुप्ता ने विद्यार्थियों को पीआईडी कंट्रोलर की कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि यह ड्रोन को संतुलित रखने और उसकी उड़ान को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग की कम्युनिकेशन लैब में आयोजित व्यावहारिक सत्र में विद्यार्थियों ने ड्रोन के विभिन्न कंपोनेंट्स को आपस में जोड़ने और असेंबल करने का अभ्यास किया।
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

