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गोरखपुर : 'डिब्बे वाली दीदी' संगीता पाण्डेय की संघर्षगाथा बनी महिला सशक्तिकरण की मिसाल,महज 1500 रुपये से सफर शुरू कर रखी सफलता की नींव

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गोरखपुर : 'डिब्बे वाली दीदी' संगीता पाण्डेय की संघर्षगाथा बनी महिला सशक्तिकरण की मिसाल,महज 1500 रुपये से सफर शुरू कर रखी सफलता की नींव
















प्रधानमंत्री ने पीएमएफएमई के तहत 50 लाख और मुख्यमंत्री ने महिला पिंक सीएफसी के लिए 4 करोड़ रुपये की दी मंजूरी

गोरखपुर, 21 जून (हि.स.)। संघर्ष, साहस और संकल्प जब एक साथ चलते हैं तो साधारण शुरुआत भी असाधारण सफलता की कहानी बन जाती है। गोरखपुर की महिला उद्यमी 'डिब्बे वाली दीदी' संगीता पाण्डेय ने महज 1500 रुपये की पूंजी से शुरू किए गए अपने छोटे से पैकेजिंग व्यवसाय को आज एक ऐसे मुकाम तक पहुंचा दिया है, जहां उनके नेतृत्व में देश का पहला महिला पिंक कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) स्थापित होने जा रहा है। यह परियोजना न केवल टेराकोटा और पैकेजिंग उद्योग को नई दिशा देगी, बल्कि हजारों महिलाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता का अवसर भी प्रदान करेगी।

हिन्दुस्थान समाचार से विशेष बातचीत में संगीता पाण्डेय ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सरकार का भी भरपूर सहयोग मिला है। उन्होंने बताया कि पीएमएफएमई (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना) के तहत उनके उद्योग को 50 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत हुई है। वहीं महिला पिंक कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है, जिससे परियोजना को गति मिली है।

सैनिक परिवार के संस्कारों ने दी संघर्ष की शक्ति

गोरखपुर जनपद की चौरी-चौरा तहसील के खुरहुरी गांव में जन्मी संगीता पाण्डेय के पिता गणेश पाण्डेय भारतीय सेना में सूबेदार रहे हैं। अनुशासन, ईमानदारी और कठिन परिस्थितियों से जूझने का जज्बा उन्हें परिवार से विरासत में मिला। प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने मोहद्दीपुर स्थित सर्वहितकारी कन्या इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट तथा दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक किया। छात्र जीवन में ही उन्होंने फैशन डिजाइनिंग, सिलाई, कढ़ाई एवं हस्तशिल्प का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

1500 रुपये, साइकिल और बड़ा सपना

वर्ष 2013 में उन्होंने मात्र 1500 रुपये की पूंजी से मिठाई के डिब्बों का छोटा कारोबार शुरू किया। आर्थिक तंगी इतनी थी कि कई बार उन्हें प्रतिदिन लगभग 50 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर बाजार जाना पड़ता था। साइकिल से कच्चा माल लाना, तैयार माल दुकानों तक पहुंचाना और ग्राहकों से संपर्क करना उनकी दिनचर्या थी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

आज उनका प्रतिष्ठान मेसर्स सिद्धि विनायक पैकेजर्स पूर्वांचल के प्रमुख पैकेजिंग उद्योगों में शामिल है, जहां फैंसी गिफ्ट बॉक्स, ज्वेलरी बॉक्स, मिठाई के डिब्बे तथा विवाह एवं उपहार पैकेजिंग सामग्री का निर्माण होता है। इनके उत्पादों की मांग पूर्वांचल, बिहार और नेपाल तक है।

हजारों महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

संगीता पाण्डेय का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना था। इसी सोच के साथ उन्होंने महिलाओं को पैकेजिंग, डिजाइनिंग, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग का प्रशिक्षण देना शुरू किया। आज उनके मार्गदर्शन में हजारों महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ चुकी हैं और अनेक महिलाएं स्वयं का उद्यम संचालित कर रही हैं।

देश का पहला महिला पिंक सीएफसी बनेगा गोरखपुर में

गोरखपुर के जैनपुर-खुटहन क्षेत्र में प्रस्तावित महिला पिंक कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) टेराकोटा एवं पैकेजिंग उद्योग के लिए आधुनिक तकनीक, अत्याधुनिक मशीनें, डिजाइनिंग, गुणवत्ता परीक्षण, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स और विपणन जैसी सभी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराएगा।

संगीता पाण्डेय ने बताया कि यह परियोजना महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और शिल्पकारों के लिए वरदान साबित होगी। इससे गोरखपुर के प्रसिद्ध टेराकोटा उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

महिला सशक्तिकरण का बनेगा राष्ट्रीय मॉडल

उन्होंने कहा कि यह केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का राष्ट्रीय मॉडल बनेगी। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाएं रोजगार मांगने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली उद्यमी बनेंगी। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल और महिला उद्यमिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक मिसाल

महिला उद्यमिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए संगीता पाण्डेय को गोरखपुर रत्न सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

महज 1500 रुपये से शुरू हुआ सफर, 50 किलोमीटर साइकिल की रोजाना यात्रा, अथक परिश्रम, प्रधानमंत्री की योजना से 50 लाख रुपये का सहयोग और मुख्यमंत्री की ओर से महिला पिंक सीएफसी के लिए 4 करोड़ रुपये की सहायता—यह पूरी यात्रा आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

संगीता पाण्डेय की यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर भारत और पूर्वांचल के औद्योगिक विकास की नई इबारत है। आने वाले समय में गोरखपुर का यह महिला पिंक सीएफसी देशभर में महिला उद्यमिता का एक प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभरेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय