नई तकनीक का उद्देश्य सीखने को सरल और प्रभावी बनाना होना चाहिए : प्रो. विनय कुमार पाठक
कानपुर, 14 जुलाई (हि.स.)। नई तकनीक का उद्देश्य केवल पढ़ाई को डिजिटल बनाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए सीखने को अधिक सरल, प्रभावी और उपयोगी बनाना होना चाहिए। शिक्षा से जुड़े शोध विश्वविद्यालयों की शोध संस्कृति को मजबूत करने के साथ भारत की वैश्विक शैक्षणिक पहचान को भी सशक्त बनाते हैं। यह बातें मंगलवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने विश्वविद्यालय के एक शोध के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित होने पर कहीं।
विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के शोधकर्ताओं के अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका एनल्स ऑफ न्यूरोसाइंसेज में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में वर्ष 2021 से 2025 के बीच दुनिया भर में प्रकाशित 1600 से अधिक शोध पत्रों का विश्लेषण कर यह समझने का प्रयास किया गया कि डिजिटल शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी, सरल और उपयोगी कैसे बनाया जा सकता है।
शोध में पाया गया कि यदि अध्ययन सामग्री को विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता के अनुरूप सरल, व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया जाए तो विषय को समझना और लंबे समय तक याद रखना अधिक आसान हो जाता है। अध्ययन के अनुसार डिजिटल शिक्षा भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है, लेकिन उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक का उपयोग विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप किस प्रकार किया जाता है।
अध्ययन में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, चीन और सिंगापुर सहित कई देशों में इस विषय पर हुए शोधों का भी विश्लेषण किया गया। निष्कर्षों में सामने आया कि डिजिटल माध्यम तभी अधिक प्रभावी साबित होते हैं, जब उन्हें शिक्षार्थियों की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अध्ययन से शिक्षक, शिक्षा संस्थान और नीति-निर्माता भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में लाभान्वित होंगे।
शोध के पत्राचार लेखक एवं शिक्षा विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विमल सिंह ने बताया कि अध्ययन का उद्देश्य बदलते समय में तकनीक के बेहतर उपयोग के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शिक्षा की सफलता तकनीक और विद्यार्थियों की जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर करेगी।
विश्वविद्यालय के अनुसार यह अध्ययन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उस उद्देश्य को भी मजबूती देता है, जिसमें तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा पर बल दिया गया है। विश्वविद्यालय ने इसे भारतीय शोध की वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

