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आत्मनिर्भर भारत के लिए टेक्नो नेशनलिज्म और इकोनोमिक पैट्रियोटिज्म को दें बढ़ावा : प्रो. राज कुमार मित्तल

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आत्मनिर्भर भारत के लिए टेक्नो नेशनलिज्म और इकोनोमिक पैट्रियोटिज्म को दें बढ़ावा : प्रो. राज कुमार मित्तल


लखनऊ, 04 मई (हि.स.)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में सोमवार को टेड एक्स कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इसके अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिशिर दीक्षित एवं डॉ.विजेंद्र चौहान, टेड एक्स मेंटर प्रो. संजय कुमार द्विवेदी, प्रो. सार्तिक बाघ, सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोशल इंक्लूजन, बीबीएयू की डॉयरेक्टर प्रो. जया श्रीवास्तव एवं फैकल्टी कार्डिनेटर डॉ. पारिस्मिता मोहंती उपस्थित रहीं।

कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की केंद्रीय भूमिका पर विशेष जोर दिया और कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रत्येक युवा को सक्रिय रूप से योगदान देना होगा। उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु स्वदेशी वस्तुओं और विचारधाराओं को बढ़ावा देना, वोकल फॉर लोकल जैसी पहलों को अपनाना, तथा टेक्नो नेशनलिज्म और इकोनॉमिक पैट्रियोटिज्म को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है जब देश की अर्थव्यवस्था 30 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंचे। इसके लिए युवाओं को केवल नौकरी खोजने तक सीमित न रहकर रोजगार सृजक बनना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में मौजूद असमानताओं को दूर करने का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय विकास प्रक्रिया तथा समावेशी विकास में महिलाओं की भागीदारी पर प्रकाश डाला।

प्रो. मित्तल ने पर्यावरणीय चुनौतियों जैसे ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण संरक्षण पर भी गंभीरता से विचार रखने की आवश्यकता बताई और कहा कि हमें नए-नए नवाचारों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। भारत की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय भारत वैश्विक जीडीपी का 25-30 प्रतिशत हिस्सा था, लेकिन विदेशी आक्रमणों के कारण यह स्थिति कमजोर हुई। उस गौरव को पुनः प्राप्त करने के लिए हर क्षेत्र में संतुलन बनाए रखते हुए मजबूत अर्थव्यवस्था का निर्माण जरूरी है, ताकि देश बाहरी आघातों का सामना कर सके। उन्होंने आयुर्वेद और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के महत्व को भी रेखांकित किया तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D) में क्रिटिकल थिंकिंग की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रो. जया श्रीवास्तव ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि जब महिलाएं सुरक्षित होंगी, तभी वे प्रगति कर पाएंगी और अपनी सामाजिक एवं कार्यस्थलीय परिस्थितियों में सकारात्मक परिवर्तन ला सकेंगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को नीति निर्माण और निर्णय लेने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि एक सुरक्षित, समान और सशक्त समाज का निर्माण हो सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय