तीर्थंकर ऋषभदेव के विचार आज भी समाज को देते हैं दिशा : कुलपति
कानपुर, 09 मार्च (हि.स.)। तीर्थंकर ऋषभदेव का जीवन और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक विचार आज भी मानव समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। ऐसे विषयों पर संगोष्ठियां नई पीढ़ी को भारतीय दर्शन और संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती हैं। इसी दिशा में विश्वविद्यालय में दाे दिवसीय दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयाेजन किया जा रहा है। यह जानकारी सोमवार को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति विनय कुमार पाठक ने दी।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में 13 और 14 मार्च को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। “तीर्थंकर ऋषभदेव: उनका सामाजिक-सांस्कृतिक अवदान” विषय पर आयोजित यह संगोष्ठी आचार्य विद्यासागर सुधासागर जैन शोधपीठ तथा दीनदयाल शोध केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में होगी।
संगोष्ठी के पहले दिन 13 मार्च को आयोजित उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक करेंगे, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन उपस्थित रहेंगी। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रति-कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी और कुलसचिव राकेश कुमार मिश्र शामिल होंगे। न्यासी अतिथि के रूप में प्रदीप जैन ‘तिजारा’ की उपस्थिति भी रहेगी।
कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के डॉ. धर्मेन्द्र कुमार जैन मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखेंगे, जबकि वाल्मीकि विद्यापीठ, काठमांडू (नेपाल) के निरज दाहाल विशिष्ट वक्ता के रूप में संबोधित करेंगे। इसके अलावा क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर की पूर्व प्राचार्या डॉ. नीता दवे जैन भी ऋषभदेव के सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डालेंगी।
दूसरे दिन 14 मार्च को तीसरा सत्र ऑनलाइन आयोजित होगा, जिसकी अध्यक्षता प्रो. अनुपम जैन (इंदौर) करेंगे। इस सत्र में अमेरिका के कैलिफोर्निया से अभय जैन, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के डॉ. सुमत कुमार जैन, आईआईटी रुड़की के प्रो. अशोक कुमार जैन, समणी संगीत प्रज्ञा जैन (लाडनूं) तथा डॉ. नीलम जैन सहित कई विद्वान संबोधित करेंगे। संगोष्ठी में शोधार्थियों द्वारा विभिन्न शोधपत्र भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

