टीबी मुक्त की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा उत्तर प्रदेश: अमित कुमार घोष
संभावित मरीजों की पहचान पर भी दिया जा रहा विशेष ध्यान
लखनऊ,16 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष ने सोमवार को कहा कि भारत सरकार के टीबी मुक्त भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को मनाया जाने वाला विश्व क्षय रोग दिवस हमें याद दिलाता है कि टीबी आज भी दुनिया की प्रमुख संक्रामक बीमारियों में से एक है लेकिन जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच कराना, पूर्ण उपचार सुनिश्चित करना और सामूहिक प्रयासों को मजबूत करना इसे समाप्त करने की कुंजी है।
अपर मुख्य सचिव ने विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में अपील की कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्य नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जागरूकता फैलाकर, समय पर जांच कराकर, उपचार पूरा करके और सामुदायिक सहयोग से हम टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश तथा टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य साकार कर सकते हैं। विश्व क्षय रोग दिवस हमें यही संदेश देता है कि यदि सरकार और समाज मिलकर संकल्प लें तो टीबी को इतिहास का हिस्सा बनाया जा सकता है।
7 दिसंबर 2024 से अभी तक चले व्यापक स्क्रीनिंग अभियान में 3 करोड़ 28 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गयी तथा प्रदेश में कुल जांचों में से लगभग 64 प्रतिशत नैट तकनीक से की गईं जिससे रोग की शीघ्र और सटीक पहचान संभव हुई।
अभियान के दौरान 2 करोड़ 99 लाख मरीजों की अधिसूचना की गई, तथा लाखों मरीजों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया और निक्षय पोषण योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की गई। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में टीबी के मामले अधिक होना स्वाभाविक है लेकिन पिछले वर्षों में जांच और उपचार सुविधाओं के विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
वर्तमान में जोखिम वाले समूहों जैसे वृद्ध, कुपोषित, संपर्क में रहने वाले, नशा करने वाले, एचआईवी संक्रमित, मधुमेह रोगी तथा मलिन बस्तियों के निवासियों पर विशेष ध्यान है। एआई आधारित 87 हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों का उपयोग हो रहा है तथा जनवरी 2026 में लखनऊ में आयोजित रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस में टीबी जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर जोर दिया गया।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

