उपयोगकर्ता की जागरूकता साइबर सुरक्षा की पहली दीवार : प्रो. हरिओम
गोरखपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसड़, गोरखपुर में राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि की स्मृति में आयोजित सप्तदिवसीय व्याख्यानमाला के चौथे दिन शुक्रवार को ‘साइबर सिक्योरिटी एंड इट्स इम्प्लिकेशन ऑन स्टूडेंट्स’ विषय पर विशिष्ट व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. हरिओम शरण ने कहा कि उपयोगकर्ता की जागरूकता साइबर सुरक्षा की पहली दीवार है।
प्रो. हरिओम शरण ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। आज प्रत्येक व्यक्ति के दो पते हैं, एक उसका भौतिक पता और दूसरा उसका वर्चुअल पता। इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने हमारी दुनिया को सुविधाजनक और तीव्र बनाया है, लेकिन इसी के साथ साइबर अपराध और डिजिटल जोखिमों की आशंकाएं भी बढ़ी हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को सचेत करते हुए कहा कि आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि हम तकनीक का उपयोग कर रहे हैं या तकनीक हमारा उपयोग कर रही है। सोशल मीडिया पर हमारी सक्रियता, हमारी पसंद-नापसंद, लोकेशन, संपर्क, रुचियां और व्यक्तिगत गतिविधियां डिजिटल फुटप्रिंट के रूप में दर्ज होती रहती हैं। साइबर अपराधी इन्हीं सूचनाओं और व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक कमजोरियों का अध्ययन कर धोखाधड़ी के नए तरीके विकसित करते हैं।
प्रो. शरण ने कहा कि साइबर हैकर केवल तकनीक का सहारा नहीं लेते, बल्कि वे मानव मनोविज्ञान को भी समझते हैं। फर्जी वेबसाइट, फिशिंग लिंक, भ्रामक संदेश, फर्जी कॉल, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन फ्रॉड और पहचान की चोरी जैसे अपराधों में व्यक्ति की जल्दबाजी, लालच, भय अथवा विश्वास का फायदा उठाया जाता है। इसलिए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध वेबसाइट पर व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करने अथवा किसी व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन या पासवर्ड साझा करने से पहले अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को पासवर्ड सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का प्रयोग, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, संदिग्ध लिंक से दूरी और समय-समय पर डिजिटल सुरक्षा की समीक्षा साइबर अपराध से बचाव के प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने विशेष रूप से विद्यार्थियों को सलाह दी कि सोशल मीडिया और नेट बैंकिंग का उपयोग करते समय सार्वजनिक वाई-फाई, अनजान एप्लीकेशन और संदिग्ध डिजिटल ऑफर से सावधान रहें तथा किसी भी प्रकार की संवेदनशील जानकारी साझा न करें।
डिजिटल तकनीकी के सुरक्षित उपयोग की जानकारी आवश्यक : विभा सिंह
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बी.एड. विभाग की प्रभारी विभा सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल तकनीक विद्यार्थियों की शिक्षा और व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है, लेकिन इसके सुरक्षित उपयोग की जानकारी भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल कंप्यूटर या मोबाइल की सुरक्षा नहीं, बल्कि व्यक्ति की पहचान, प्रतिष्ठा, आर्थिक संसाधनों और मानसिक शांति की सुरक्षा भी है। उन्होंने कहा कि जागरूक विद्यार्थी ही सुरक्षित डिजिटल समाज के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग की प्रभारी डॉ. आरती सिंह ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

