नींद की कमी को भी हृदय रोग के जोखिम के तौर पर गंभीरता से लेना जरूरी : डॉ. अनुराग मेहरोत्रा
कानपुर, 20 अगस्त (हि.स.)। हृदय स्वास्थ्य में पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद को भी खान-पान, व्यायाम और रक्तचाप की तरह गंभीरता से लिया जाना चाहिए। खराब नींद हृदय रोग के ऐसे जोखिम कारकों में शामिल हो सकती है, जिनमें सुधार संभव है। यह बातें गुरुवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने कानपुर कार्डियोलॉजी समिट 2026 को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं।
के-केयर हॉस्पिटल, कानपुर में डॉ. अमित कुमार और उनकी टीम के अध्ययन में हार्ट अटैक के मरीजों की नींद से जुड़ी आदतों का आकलन किया गया। अध्ययन के मुताबिक 55 प्रतिशत मरीज हार्ट अटैक से पहले के महीनों में रोजाना सात घंटे से कम सो रहे थे। इनमें 36 प्रतिशत मरीज चार से छह घंटे और नौ प्रतिशत चार घंटे से भी कम नींद लेते थे। केवल 45 प्रतिशत मरीजों को सात से नौ घंटे की अनुशंसित नींद मिल रही थी।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि हार्ट अटैक से पहले वाले सप्ताह में 45 प्रतिशत मरीजों ने सामान्य से कम सोने की बात कही। वहीं, 36 प्रतिशत ने अपनी नींद की गुणवत्ता को काफी खराब या बहुत खराब बताया। 55 प्रतिशत मरीजों में नियमित खर्राटे लेने की शिकायत मिली, जो स्लीप एपनिया की संभावित स्थिति की ओर संकेत करती है। हालांकि अध्ययन में किसी मरीज का इसका औपचारिक निदान नहीं हुआ था।
अन्य जोखिम कारकों में सभी मरीजों में उच्च रक्तचाप, 82 प्रतिशत में पारिवारिक हृदय रोग का इतिहास, 64 प्रतिशत में मधुमेह और 55 प्रतिशत में निष्क्रिय जीवनशैली पाई गई।
अध्ययन के मुख्य अन्वेषक और कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित कुमार ने कहा कि कम नींद रक्तचाप, सूजन और तनाव से जुड़े हार्मोन के माध्यम से हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकती है। उन्होंने बताया कि अध्ययन अभी जारी है और आगे अधिक मरीजों को इसमें शामिल किया जाएगा।
इस मौके पर 22 और 23 अगस्त को किंग्स्टन रिजॉर्ट में होने वाले कानपुर कार्डियोलॉजी समिट 2026 की जानकारी भी दी गई। कार्डियोमेटाबोलिक सोसाइटी के आयोजन में देश-विदेश के विशेषज्ञ प्रिवेंटिव और क्लिनिकल कार्डियोलॉजी, कार्डियक इमेजिंग, हार्ट फेल्योर, इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी, स्ट्रक्चरल और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे।
कॉन्फ्रेंस चेयरपर्सन डॉ. मोहम्मद अहमद ने कहा कि ऐसे सम्मेलन चिकित्सकों को नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों से जुड़ने का अवसर देते हैं।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

