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साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करना राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता : प्रो. मणिन्द्र अग्रवाल

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साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करना राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता : प्रो. मणिन्द्र अग्रवाल


कानपुर, 24 जुलाई (हि.स.)। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन तैयार करना आज राष्ट्रीय सुरक्षा की अहम आवश्यकता है। आईआईटी कानपुर का सी3आईहब भारतीय सेना के साथ मिलकर इस दिशा में प्रभावी योगदान दे रहा है। यह बातें शुक्रवार को आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणिन्द्र अग्रवाल ने सी3आईहब के साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे बैच के सफल समापन पर कहीं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र ने भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड के लिए आयोजित छह माह के साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे बैच का सफलतापूर्वक समापन किया। लखनऊ स्थित सेंट्रल कमांड मुख्यालय में आयोजित समापन समारोह में 70 सैन्यकर्मियों को प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इसके साथ ही दो बैचों में प्रशिक्षित सैन्यकर्मियों की संख्या बढ़कर 140 हो गई है।

छह माह का यह हाइब्रिड साइबर सुरक्षा प्रमाणन कार्यक्रम रक्षा और नागरिक सुरक्षा क्षेत्रों के लिए दक्ष साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ तैयार करने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम को तीन-तीन माह के बेसिक और एडवांस्ड मॉड्यूल में विभाजित किया गया है, जिसमें ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रत्येक मॉड्यूल में कुल 96 घंटे की पढ़ाई और व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल है।

बेसिक मॉड्यूल में प्रतिभागियों को लिनक्स सिस्टम, नेटवर्किंग, साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस, ऑपरेटिंग सिस्टम सुरक्षा, सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर की कार्यप्रणाली तथा साइबर घटनाओं के प्रबंधन की जानकारी दी जाती है। साथ ही बर्प सूट, वायरशार्क, एनमैप, नेसस और स्प्लंक जैसे आधुनिक साइबर सुरक्षा उपकरणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी कराया जाता है।

एडवांस्ड मॉड्यूल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुरक्षा विश्लेषण, एआई एजेंट, बिग डेटा टेलीमेट्री, पावर बीआई आधारित लॉग विश्लेषण, मैलवेयर विश्लेषण, डिजिटल एवं नेटवर्क फॉरेंसिक तथा वल्नरेबिलिटी असेसमेंट एंड पेनिट्रेशन टेस्टिंग जैसे उन्नत विषय शामिल हैं। दोनों मॉड्यूल के अंत में सैद्धांतिक और व्यावहारिक मूल्यांकन के बाद सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाते हैं।

आईआईटी कानपुर के अनुसार, सी3आईहब और भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड के बीच यह सहयोग देश की साइबर रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिससे भविष्य की साइबर चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार किए जा रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप