विकसित प्रदेश और विकसित भारत के निर्माण में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका : केशव प्रसाद माैर्य
लखनऊ, 01 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि प्रदेश सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत के निर्माण में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
उप मुख्यमंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं, अनुदानों एवं प्रोत्साहनों की व्यापक जानकारी उद्यमियों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक उद्यमियों को इस क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाए, ताकि किसानों की उपज को बेहतर बाजार एवं उचित मूल्य मिल सके तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें।
इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बी.एल. मीणा की अध्यक्षता में खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय में उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत गठित एप्रेजल समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पोर्टल पर प्राप्त नवीन निवेश प्रस्तावों का परीक्षण किया गया तथा समिति के समक्ष प्रस्तुत प्रस्तावों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में प्राप्त कुल 12 नवीन आवेदनों पर विचार किया गया। परीक्षण के उपरांत इनमें से 10 प्रस्तावों को आवश्यक शर्तों की पूर्ति के अधीन स्वीकृति हेतु संस्तुति प्रदान की गई।
संस्तुत परियोजनाओं में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की विभिन्न गतिविधियां शामिल हैं। इनमें कैटल फीड, अनाज एवं रिफाइंड मसाले, मूंगफली प्रसंस्करण, फ्रोजन एवं अन्य खाद्य उत्पाद, रेडी-टू-कुक उत्पाद, तेल-आटा-दाल-बेसन निर्माण, दाल मिल तथा फ्रोजन फ्रूट्स एवं वेजिटेबल प्रोसेसिंग जैसी इकाइयां शामिल हैं। कई प्रस्तावों में इकाइयों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सोलर पावर प्लांट स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।
एप्रेजल समिति द्वारा संस्तुत परियोजनाओं में निर्धारित शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें स्थानीय किसानों से कच्चे माल की खरीद, आवश्यक प्लांट मैप, फायर एवं प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रमाण-पत्र, उत्पादन क्षमता के उपयोग तथा विद्युत बिल एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना शामिल है।
बैठक में एक प्रस्ताव को अभिलेखों के आधार पर पात्रता पूरी न होने के कारण निरस्त किया गया। वहीं, एक अन्य प्रस्ताव में प्लांट एवं मशीनरी से संबंधित आवश्यक विवरण उपलब्ध कराए जाने के बाद आगामी एप्रेजल समिति की बैठक में विचार किए जाने का निर्णय लिया गया।
समिति ने यह भी निर्देशित किया कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत प्रथम किस्त प्राप्त करने वाली संस्थाओं को द्वितीय किस्त निर्गत करने पर तभी विचार किया जाए, जब संबंधित इकाइयां आरओएफसी के माध्यम से अपने उत्पाद का परीक्षण कराकर परीक्षण आख्या उपलब्ध कराएं।
बैठक का उद्देश्य प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नवीन निवेश को प्रोत्साहित करना, स्थानीय कृषि उपज का मूल्य संवर्धन बढ़ाना, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।
खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नीति-2023 के अंतर्गत प्राप्त निवेश प्रस्तावों के समयबद्ध परीक्षण एवं आवश्यक अनुमोदन की प्रक्रिया निरंतर जारी है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर कृषि उपज का बेहतर मूल्य संवर्धन हो, किसानों की आय में वृद्धि हो तथा युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित किए जा सकें।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय

