कला का कोई शॉर्टकट नहीं, साधना से ही संवरते हैं सुर : मनोज गुप्ता
--गायक मनोज गुप्ता ने युवाओं को दिए सफलता के सूत्र
प्रयागराज, 18 अप्रैल (हि.स)। ‘‘सुरों को साधने के लिए निरंतरता ही एकमात्र मंत्र है। चाहे 15 मिनट ही सही, लेकिन रियाज रोज होना चाहिए। बिना राग और ताल की बुनियादी नींव के संगीत की इमारत नहीं टिकती।’’ यह बातें शनिवार को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के लिए चयनित प्रसिद्ध गायक मनोज गुप्ता ने व्यक्त किए।
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित ’विमर्श’ कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए उन्होंने अपनी 38 वर्षों की लंबी संगीतमय यात्रा के अनुभव साझा किए।
गंगा-जमुनी तहजीब से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
मनोज गुप्ता ने बताया कि उनके सुगम संगीत की यात्रा प्रयागराज की साझा संस्कृति से शुरू होकर देश के हर बड़े मंच तक पहुंची। उन्होंने अपने शुरुआती रियाज़ के दिनों और गुरु-शिष्य परम्परा के महत्व को याद करते हुए कई भावुक संस्मरण सुनाए। उन्होंने कहा कि एक कलाकार के लिए श्रोता ही असली पारखी होते हैं और हर छोटा-बड़ा मंच सीखने का एक नया अवसर है।
--युवाओं के लिए ’संगीत सूत्र’ और ‘मौलिकता का पाठ’ उन्होंने आज की पीढ़ी को मौलिकता का मंत्र देते हुए कहा कि अपनी मिट्टी और भाषा के लोकगीतों व भजनों को गाएं, क्योंकि मौलिकता वहीं से आती है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि बड़े कलाकारों को सुनने की आदत डालें। क्योंकि सुनने से ही गला और समझ दोनों तैयार होते हैं। आधुनिक दौर की चुनौतियों पर उन्होंने बेबाकी से कहा, “आज की नई पीढ़ी को फोन की आभासी दुनिया से थोड़ा समय निकालकर सुरों की साधना को देना चाहिए। कला के क्षेत्र में कोई शॉर्टकट नहीं होता।“
--शिष्य की लगन ही असली पुरस्कारमनोज गुप्ता ने पुरस्कारों से कहीं ऊपर शिष्य की लगन को रखते हुए भावुक स्वर में कहा, “मेरे लिए असली पुरस्कार वह नहीं जो सम्मान के रूप में मंच पर मिले, बल्कि असली पुरस्कार तो उस दिन मिलता है जब कोई युवा मुझसे प्रेरित होकर हाथ में तानपुरा उठा ले।“
कार्यक्रम के सूत्रधार राजकुमार के सवालों का जवाब देते हुए मनोज गुप्ता ने संगीत की बारीकियों पर प्रकाश डाला। अंत में एक जीवंत प्रश्नोत्तर सत्र भी हुआ, जिसमें युवाओं ने गायन और करियर से जुड़े सवाल पूछे। इस अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने मुख्य वक्ता को पौधा व अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

