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श्रीमद्भागवत कथा से आत्मिक मुक्ति का मार्ग प्रशस्त : शिवानन्द भाई श्री महाराज

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श्रीमद्भागवत कथा से आत्मिक मुक्ति का मार्ग प्रशस्त : शिवानन्द भाई श्री महाराज


श्रीमद्भागवत कथा से आत्मिक मुक्ति का मार्ग प्रशस्त : शिवानन्द भाई श्री महाराज


जौनपुर, 23अप्रैल (हि.स.)। नगर के बीआरपी इंटर कॉलेज के मैदान में बुधवार को सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन नैमिषारण्य, सीतापुर स्थित सनातन उत्थान फाउंडेशन के संस्थापक शिवानन्द भाई श्री महाराज के सानिध्य में प्रारंभ हुआ।कथा के प्रथम दिन शिवानन्द महाराज ने कलयुग में श्रीमद्भागवत की महिमा और संकीर्तन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भगवान की स्तुति के साथ भागवत महात्म्य का वर्णन करते हुए गोकर्ण और उनके भाई धुंधकारी का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि धुंधकारी अपने जीवन में दुष्कर्मों में लिप्त रहा, जिसके कारण मृत्यु के बाद वह प्रेत योनि में चला गया। गोकर्ण ने अपने भाई की मुक्ति के लिए सूर्य भगवान के निर्देश पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया, जिसके श्रवण मात्र से धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति प्राप्त हुई।महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित है, जो भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अमृत स्रोत है। इसके श्रवण से व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है और भगवान के प्रति श्रद्धा बढ़ती है। उन्होंने कहा कि इस पावन कथा को सुनने से मनुष्य को मृत्यु का भय नहीं रहता और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।कार्यक्रम में जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र सिंह एवं मुख्य विकास अधिकारी ध्रुव खड़िया ने भी पहुंचकर कथा का श्रवण किया और आरती में भाग लिया। जिलाधिकारी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अत्यंत पुण्यदायी है। उन्होंने व्यासपीठ पर विराजमान गुरुजी की सराहना करते हुए कहा कि ज्ञान ही सबसे बड़ा सम्मान है और जिनके पास भागवत का ज्ञान है, उनका स्थान सर्वोच्च होता है। उन्होंने लोगों से कथा के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।इस अवसर पर बीआरपी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रमोद श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव ‘हैप्पी’, नवनीत श्रीवास्तव, अंजना सिंह, प्रदीप सिंह ‘रिंकू’, मनीष चौरसिया, ऋतुराज सिंह ‘छोटू’, सतीश सिंह एवं वरिष्ठ पत्रकार विश्व प्रकाश श्रीवास्तव सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव